जमीन खरेदी-बिक्री अब आसान, 7/12 समेत सारी जानकारी एक क्लिक पर: महसूल मंत्री बावनकुळे
महाराष्ट्र सरकार ने जमीन से जुड़े व्यवहार आसान और पारदर्शी बनाने के लिए 'महाभूमी स्टॅक' नाम की नई डिजिटल प्रणाली शुरू की है।
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राज्य में जमीन से जुड़े कामकाज को आसान और पारदर्शी बनाने के मकसद से राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जमीन की खरीद-बिक्री, 7/12 उतारा, भू-नकाशे और पुरानी फेरफार रिकॉर्ड जैसी अलग-अलग सेवाओं को अब एक ही डिजिटल जगह पर लाने के लिए 'महाभूमी स्टैक' सिस्टम तैयार किया गया है। महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने इस नई व्यवस्था की जानकारी दी।
महसूल विभाग की अलग-अलग डिजिटल प्रणालियों को एक साथ जोड़कर जमीन से जुड़ी दस बड़ी सेवाओं के लिए अब सिर्फ एक ही डिजिटल दरवाजा उपलब्ध कराया जाएगा। इसका मतलब यह है कि लोगों को जानकारी के लिए अलग-अलग पोर्टल पर भटकने की जरूरत नहीं रहेगी। जमीन से जुड़े जरूरी कागजात और डिटेल एक ही जगह मिलने से व्यवहार में लगने वाला समय और कागजी झंझट दोनों कम होंगे।
इस नई प्रणाली में राज्य के 3.5 करोड़ से ज्यादा 7/12 और 8-अ उतारे मौजूद होंगे। इसके साथ ही करीब डेढ़ करोड़ भू-नकाशे और 40 करोड़ पुरानी फेरफार रिकॉर्ड तथा रजिस्ट्रेशन दस्तावेज भी एक क्लिक पर देखे जा सकेंगे। इससे जमीन खरीदने-बेचने से पहले जो जानकारी चाहिए होती है, वो लोगों को आसानी से मिल जाएगी।
इस प्रणाली का मकसद जमीन की सर्च रिपोर्ट और उससे जुड़ी बाकी डिटेल्स को डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराना है। 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने की दिशा में महसूल विभाग का यह कदम अहम माना जा रहा है। खासकर किसानों और जमीन मालिकों को इस सुविधा से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
इसके अलावा आदिवासी इलाकों के किसानों के लिए भी सरकार ने एक अहम मुहिम शुरू की है। वनपट्टों से जुड़े पेंडिंग दावों को निपटाने के लिए 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक गांव स्तर की वनहक्क समितियों की बैठकें होंगी। ग्रामसभा के जरिए वनहक्क दावों को मंजूरी देने का काम किया जाएगा।
इस मुहिम के दौरान पेंडिंग वनपट्टा दावों पर सुनवाई करके योग्य लाभार्थियों को वनहक्क दिलाने की कोशिश की जाएगी। इसलिए आदिवासी इलाकों के किसानों और वनहक्क दावेदारों के लिए भी यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
'महाभूमी स्टैक' से राज्य में जमीन से जुड़ी जानकारी लोगों तक और आसानी से पहुंचेगी, साथ ही व्यवहार में आने वाली रुकावटें भी कम होने की उम्मीद है। एक ही डिजिटल सिस्टम से कई सेवाएं मिलने से लोगों का समय बचेगा और जमीन के लेन-देन को और आसान तथा पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।