HIV के मरीजों में उम्र बढ़ने पर दिल, हड्डी और दिमाग की सेहत पर भी ध्यान जरूरी
एंटीरिट्रोवायरल थेरपी से HIV मरीज लंबी उम्र तो जी रहे हैं, लेकिन बढ़ती उम्र में दूसरी सेहत की परेशानियों पर भी नजर रखना जरूरी है
HIV के मरीजों के लिए एंटीरिट्रोवायरल थेरपी यानी ART एक अहम इलाज है। इसमें कई दवाओं का साथ में इस्तेमाल किया जाता है, ताकि शरीर में HIV का लेवल कम हो, इम्यून सिस्टम बेहतर काम करे और HIV से जुड़ी बीमारियों का खतरा घटे। यह थेरपी HIV को पूरी तरह ठीक नहीं करती, लेकिन नियमित इलाज लेते रहने से मरीज लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जिंदगी जी सकते हैं।
इलाज में हुई तरक्की की वजह से अब HIV के साथ जीने वालों की उम्र भी बढ़ गई है। इसी वजह से अब सिर्फ HIV के इलाज पर ही नहीं, बल्कि उम्र बढ़ने के साथ आने वाली दूसरी सेहत की जरूरतों पर भी ध्यान देना जरूरी हो गया है। यह जानकारी BDR Pharmaceuticals International Pvt. Ltd. के टेक्निकल डायरेक्टर डॉ. अरविंद बडिगर ने दी।
उम्र के साथ दिल की सेहत का ख्याल रखना बहुत जरूरी हो जाता है। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी दूसरी दिक्कतों से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है। HIV से जुड़ी लंबे समय की सूजन यानी इंफ्लेमेशन भी इस खतरे को और बढ़ा सकती है। इसलिए प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप को गंभीरता से लेना चाहिए।
डॉक्टरों के मुताबिक ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच करानी चाहिए। सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज से वजन कंट्रोल में रखना चाहिए। स्मोकिंग से बचना चाहिए और हार्ट डिजीज के दूसरे रिस्क फैक्टर पर भी कंट्रोल रखना चाहिए। साथ ही जो भी दवाएं नियमित ली जा रही हैं, उनकी डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए।
बढ़ती उम्र में HIV के साथ मेटाबॉलिज्म से जुड़ी सेहत और हड्डियों की सेहत पर भी खास ध्यान देना जरूरी है। ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और शरीर में फैट के प्रमाण में होने वाले बदलाव डायबिटीज और दूसरी मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। हड्डियों की सेहत भी उतनी ही अहम है, क्योंकि हड्डियों का घनत्व कम होने से फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए नियमित हेल्थ चेकअप से ऐसे बदलावों की शुरुआती स्टेज में ही पहचान हो जाए, तो फायदा होता है।
सही और पौष्टिक खाना, वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज और मसल्स की ताकत व सेहत बनाए रखने से हड्डियों की सेहत अच्छी रखने में मदद मिल सकती है। व्यक्ति की सेहत के हिसाब से डॉक्टर जरूरत पड़ने पर एक्स्ट्रा जांच या इलाज की सलाह दे सकते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग और मानसिक सेहत पर भी ध्यान देना जरूरी है। HIV के साथ जीने वाले कुछ लोगों में याददाश्त, ध्यान लगाने या दूसरे कॉग्निटिव कामों से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं। अगर ऐसी परेशानियां बार-बार महसूस हों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डाल रही हों, तो इन्हें सिर्फ उम्र बढ़ने का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पर्याप्त और अच्छी नींद, नियमित फिजिकल एक्सरसाइज, सामाजिक मेलजोल और हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज जैसी बीमारियों पर कंट्रोल रखने से हेल्दी एजिंग में मदद मिल सकती है। मेंटल हेल्थ को भी उतनी ही अहमियत देना जरूरी है।
आजकल HIV का इलाज पहले से ज्यादा असरदार हो गया है, जिस वजह से डायग्नोसिस के बाद कई मरीज लंबे समय तक जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ सिर्फ HIV के इलाज तक ही हेल्थ मैनेजमेंट सीमित न रखकर दूसरी सेहत से जुड़ी बातों पर भी ध्यान देना जरूरी है। दिल की सेहत, ब्लड शुगर, किडनी और लिवर का काम, हड्डियों की सेहत और कॉग्निटिव हेल्थ की नियमित जांच करना जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति को दूसरी बीमारियों के लिए कई दवाएं चल रही हैं, तो उन दवाओं की भी डॉक्टर की सलाह से समय-समय पर समीक्षा जरूरी है।
इसलिए HIV के बारे में जागरूकता फैलाते वक्त सिर्फ बीमारी और उसके इलाज तक फोकस सीमित न रखकर, HIV के साथ जीने वाले लोगों की पूरी सेहत और हेल्दी एजिंग का भी ख्याल रखना जरूरी है।