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00:24 IST

गोंदिया राष्ट्रीय लोक अदालत में 17,585 केस निपटे, साढ़े 8 करोड़ रुपये की वसूली

गोंदिया जिले में 12 सितंबर 2026 को हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में हजारों पुराने केस सुलह से निपटाए गए।

गोंदिया राष्ट्रीय लोक अदालत में 17,585 केस निपटे, साढ़े 8 करोड़ रुपये की वसूली
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गोंदिया जिले में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई गई, जिसमें साल दर साल कोर्ट में पड़े हजारों केस सुलह और आपसी समझौते से निपटा दिए गए। यह लोक अदालत नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, सुप्रीम कोर्ट नई दिल्ली और महाराष्ट्र स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, हाई कोर्ट मुंबई के निर्देश पर आयोजित की गई थी। जिला विधी सेवा प्राधिकरण गोंदिया के साथ-साथ जिले की सभी तालुका विधी सेवा समितियों ने तालुका कोर्टों में भी लोक अदालत लगवाई।

लोक अदालत का उद्घाटन जिला न्यायाधीश-2 एम.टी. असीम के हाथों हुआ। उद्घाटन के बाद उन्होंने मौजूद लोगों को लोक अदालत के फायदे और इसकी अहमियत के बारे में बताया। जिला विधी सेवा प्राधिकरण के सचिव एन.के. वाळके और गोंदिया जिला बार असोसिएशन के अध्यक्ष एस.आर. बोरकर ने भी लोगों से ज्यादा से ज्यादा केस सुलह से निपटाने की अपील की।

इस लोक अदालत में कोर्ट में पेंडिंग 5,563 केस रखे गए थे, जिनमें से 1,124 केस सुलह से निपटे और इनसे 5 करोड़ 78 लाख 59 हजार 482 रुपये वसूल हुए। इसके अलावा 71,568 प्री-लिटिगेशन केसों में से 16,461 केस निपटाए गए, जिनसे 2 करोड़ 79 लाख 22 हजार 335 रुपये की वसूली हुई। इस तरह कुल मिलाकर 17,585 केस सफलतापूर्वक निपटाए गए और इनमें कुल 8 करोड़ 57 लाख 81 हजार 817 रुपये की वसूली हुई।

स्पेशल ड्राइव के तहत जिले के कोर्टों में कुल 228 फौजदारी केस रखे गए थे, जिनमें से 167 केस निपटा दिए गए। इससे संबंधित पक्षकारों को लंबी चलने वाली कोर्ट की प्रक्रिया से होने वाली मानसिक और आर्थिक परेशानी से राहत मिली। सुलह से केस निपटने पर कई पक्षकारों ने संतोष जताया।

इस लोक अदालत की खास बात यह रही कि महावितरण, बिजली, पानी, टेलीफोन और बैंक वसूली से जुड़े प्री-लिटिगेशन केसों में पक्षकारों ने समझौते के मुताबिक बकाया रकम संबंधित विभाग में जमा की, जिसके बाद उनके केस हमेशा के लिए निपटा दिए गए। इससे संबंधित विभाग और बकायादारों दोनों का आगे का कोर्ट खर्च और मानसिक तनाव बच गया।

जिला न्यायालय-1, गोंदिया में पेंडिंग दो मोटर एक्सीडेंट क्लेम भी इस लोक अदालत में सुलह से निपटाए गए। मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के न्यायमूर्ती और गोंदिया जिले के पालक न्यायमूर्ती एम.डब्ल्यू. चांदवाणी के हाथों तथा जिला विधी सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व प्रमुख जिला व सत्र न्यायाधीश आर.जी. वाघमारे की मौजूदगी में आवेदकों को मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपये और 24 लाख 25 हजार रुपये के दो चेक दिए गए, यानी कुल 49 लाख 25 हजार रुपये। इस दौरान जिला न्यायाधीश-2 एम.टी. असीम, पैनल नंबर 1 के प्रमुख व जिला न्यायाधीश-4 ए.सी. खुराणा और जिला विधी सेवा प्राधिकरण के सचिव एन.के. वाळके भी मौजूद थे।

एक दिव्यांग बुजुर्ग नागरिक का मोटर एक्सीडेंट अथॉरिटी में पेंडिंग केस भी इसी लोक अदालत में सुलह के लिए रखा गया था। ये बुजुर्ग उम्रदराज और दिव्यांग होने की वजह से कोर्ट रूम तक नहीं आ सकते थे। यह देखते हुए पैनल नंबर 1 के अध्यक्ष व जिला न्यायाधीश-4 ए.सी. खुराणा और सदस्य एडवोकेट चंदन वानखेडे कोर्ट परिसर में उनकी गाड़ी के पास खुद जाकर उनसे बात करने पहुंचे। इसके बाद यह केस सुलह से हमेशा के लिए निपटा दिया गया। यह लोक अदालत के जरिए आम लोगों तक आसानी से न्याय पहुंचाने की एक अहम मिसाल बनी।

जिला विधी सेवा प्राधिकरण, गोंदिया में दाखिल एक वैवाहिक प्री-लिटिगेशन केस में भी लोक अदालत के जरिए समझौता कराने में कामयाबी मिली। दोनों पक्षों की सहमति से केस निपटाया गया और आवेदक अपनी बेटी के साथ ससुराल में रहने चली गई। इस तरह लोक अदालत ने सिर्फ कानूनी विवाद ही नहीं सुलझाए, बल्कि पारिवारिक मेल-मिलाप कराने में भी मदद की।

इस राष्ट्रीय लोक अदालत के जरिए बड़ी संख्या में केस सुलह से निपटने पर नागरिकों का समय, पैसा और मानसिक परेशानी बची, और आसान व तेज न्याय देने के मकसद को जिले में अच्छा रिस्पॉन्स मिला। इस लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए कोर्ट स्टाफ ने काफी मेहनत की।

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