गोंदिया नगर परिषद में सालों बाद मालमत्ता कर निर्धारण, नागपुर की कंपनी को ठेका
गोंदिया नगर परिषद के इलाके में पिछले कई सालों से मालमत्तों का कर निर्धारण नहीं हुआ था, जिससे परिषद को कर के रूप में मिलने वाला बड़ा रेवेन्यू नहीं मिल पा रहा था। अब नागपुर की कोलब्रो प्रायव्हेट लिमिटेड को यह काम सौंपा गया है।
गोंदिया शहर में मालमत्तों का असेसमेंट यानी कर निर्धारण पिछले कई सालों से नहीं हुआ था। इस वजह से नगर परिषद को मालमत्ता कर के जरिए मिलने वाले बड़े रेवेन्यू से हाथ धोना पड़ रहा था। यह बात परिषद के ध्यान में आने के बाद अब मालमत्ता कर निर्धारण का काम शुरू कर दिया गया है। सोमवार, यानी 8 तारीख से इस काम की शुरुआत हुई है, और इसका कंत्राट नागपुर की एक एजंसी को दिया गया है।
नगर परिषद का पूरा कामकाज काफी हद तक मालमत्ता कर से आने वाली रकम पर ही टिका होता है। लेकिन गोंदिया नगर परिषद इसी रकम से वंचित रह गई थी, जो प्रशासन को अब समझ में आया। इसके बाद सर्व साधारण सभा में शहर की मालमत्तों का कर निर्धारण करने का फैसला लिया गया और उसी के तहत निविदाएं मंगाई गई थीं। इस प्रक्रिया में नागपुर की कोलब्रो प्रायव्हेट लिमिटेड कंपनी को मालमत्ता कर निर्धारण का कंत्राट दिया गया। कंपनी ने सोमवार, 8 तारीख से अपना काम शुरू भी कर दिया है।
कंपनी को यह पूरा काम पूरा करने के लिए 9 महीने का समय दिया गया है। नगर परिषद के रेकॉर्ड के मुताबिक शहर में फिलहाल 46 हजार 318 मालमत्ता दर्ज हैं। लेकिन इनका भी कर निर्धारण पिछले कई सालों से नहीं हुआ, जिस वजह से इतने साल से इन्हीं मालमत्तों से पहले जितना ही कर लिया जा रहा है। जबकि इस दौरान शहरीकरण के साथ-साथ शहर की आबादी भी बढ़ी है, तो जाहिर है कि मालमत्तों की संख्या में भी इजाफा हुआ होगा, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन पालिका को अभी सिर्फ उतनी ही मालमत्तों से कर मिल पा रहा है जितनी उसके रेकॉर्ड में दर्ज हैं। अब जब यह कर निर्धारण पूरा हो जाएगा, तो नई बनी मालमत्ता भी रेकॉर्ड में आ जाएंगी और पालिका के खजाने में आवक बढ़ना तय है।
बताया गया है कि नगर परिषद ने कोलब्रो कंपनी को करीब 1,200 रुपये प्रति मालमत्ता के हिसाब से कंत्राट दिया है। फिलहाल मालमत्तों को क्रमांक देने का काम चल रहा है, जिसके लिए कंपनी के 25 कर्मचारी शहर में पहुंचे हैं। आगे जैसे-जैसे नापी और बाकी काम बढ़ेगा, कंपनी अपने कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाएगी। कंपनी को इस पूरे काम के लिए 9 महीने का समय दिया गया है।