गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:41 IST

गोंदिया में शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने 'चलो स्कूल चलें' अभियान की समीक्षा की

गोंदिया जिला कलेक्टर कार्यालय में हुई बैठक में शिक्षा आयुक्त ने कहा, शिक्षा समाज का केंद्रबिंदु होना चाहिए और स्कूलों को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।

गोंदिया में शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने 'चलो स्कूल चलें' अभियान की समीक्षा की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

शिक्षा के बिना कोई चारा नहीं है और देश की तरक्की शिक्षा से ही मुमकिन है, इसीलिए शिक्षा को समाज का केंद्रबिंदु बनना चाहिए। यह बात शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने गोंदिया जिलाधिकारी कार्यालय के सभागृह में 'चलो स्कूल चलें' अभियान की समीक्षा बैठक में कही। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ जरूरी सुविधाएं और कौशल आधारित शिक्षा भी मिलनी चाहिए।

9 तारीख को हुई इस बैठक में जिलाधिकारी मंदार पत्की, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेनित चंद्रा दोंतुला, जिला नोडल अधिकारी प्रकाश मुकूंद और जिला शिक्षण व प्रशिक्षण संस्था (डायट) के प्राचार्य राजकुमार हिवारे समेत संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

सिंह ने कहा कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली तो उनका जीवन जल्दी ही उज्ज्वल हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की अलग-अलग योजनाएं असरदार तरीके से स्कूलों तक पहुंचनी चाहिए और स्कूलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए जिला विकास समिति (DPDC) के जरिए फंड दिया जाए ताकि विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। स्कूलों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अलग-अलग कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। उनकी शैक्षणिक कमियां पहचानकर उन पर सही उपाय करना शिक्षकों की जिम्मेदारी है और शिक्षकों को अपनी भूमिका ठीक से निभानी चाहिए, ऐसे निर्देश उन्होंने दिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों को जिले के विद्यार्थियों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश करते रहना चाहिए, ताकि आने वाले समय में विद्यार्थियों का स्तर सुधरे और इसके अच्छे नतीजे दिखें।

सिंह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से जो सतत विकास की नीति तय की गई है, उसमें शिक्षा भी शामिल है और दुनिया के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए फंड दिया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार के नीती आयोग और राज्य सरकार की तरफ से आकांक्षित जिले और तालुके तय किए गए हैं, जिनमें गोंदिया जिले के सालेकसा, देवरी, अर्जुनी मोरगाव और सडक अर्जुनी ये चार तालुके शामिल हैं। इन तालुकों के स्कूलों में विद्यार्थियों को खास ध्यान देकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि पढ़ाई से यह भी सामने आया है कि प्राथमिक स्कूल के बाद दिव्यांग विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने का प्रमाण ज्यादा दिखता है, इसलिए स्थानीय शिक्षकों को पालकों का भरोसा जीतकर ऐसे विद्यार्थियों को सही स्कूल में दाखिला दिलाना चाहिए।

शिक्षा विभाग के साधन व्यक्तियों की क्षमता समय-समय पर जांचने के लिए उनकी परीक्षा ली जाए और साधन व्यक्तियों को ज्यादा सक्षम होकर हर महीने स्कूलों को भेंट देकर शैक्षणिक गुणवत्ता की समीक्षा करनी चाहिए, ऐसा भी सिंह ने कहा। शिक्षा विभाग के अलावा दूसरे प्रशासकीय अधिकारियों को एक-एक स्कूल गोद लेकर उसके विकास में योगदान देना चाहिए। पीएम पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए किसी विद्यार्थी की मां से खाने का स्वाद चखवाने की व्यवस्था करने की सलाह भी उन्होंने दी।

शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में ज्यादा फंड खर्च करके विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरतें पूरी करने को प्राथमिकता दी जाए। बढ़िया काम करने वाले शिक्षकों को प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया जाए, इससे शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलेगा और स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, ऐसा सिंह ने बताया। विद्यार्थियों की गुणवत्ता और क्षमता आंगनवाड़ी या पहली कक्षा से ही पहचानकर उसी हिसाब से उन्हें मार्गदर्शन दिया जाए। लड़की स्कूल क्यों नहीं आ रही, इसकी जानकारी यू-डायस सिस्टम से मिलती है और इस जानकारी का इस्तेमाल करके छात्राओं की स्कूल में हाजिरी बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

सिंह ने कहा कि जिले के विद्यार्थी बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए दूसरे जिले में न जाएं, इसके लिए जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधाएं बनाने पर जोर दिया जाए। हर स्कूल में साफ पीने का पानी, स्वच्छ शौचालय, स्कूल और परिसर की सफाई, खेल का मैदान, चारदीवारी, बिजली की सुविधा, जरूरी फर्नीचर और ई-सुविधाएं होनी चाहिए। बदलते वक्त के हिसाब से शिक्षा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए। व्यावसायिक शिक्षा आज की जरूरत है और यह मुकाबले का दौर होने की वजह से विद्यार्थियों के कौशल विकास पर खास जोर देना जरूरी है। गांव और स्कूल के रिश्ते और मजबूत करके शिक्षा प्रक्रिया में समाज की भागीदारी बढ़ाई जाए, ऐसा भी उन्होंने कहा।

सिंह ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार से भी विद्यार्थियों को शिक्षा मिलती है, इसलिए उन्हें अनुभव आधारित, व्यवहार केंद्रित और कौशल आधारित शिक्षा देने की जरूरत है। "मेरा स्कूल सशक्तिकरण" सिर्फ शिक्षा विभाग की नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और जिले के हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रशासन, शिक्षक, पालक और समाज को मिलकर काम करना चाहिए, यह कहते हुए सिंह ने 'चलो स्कूल चलें' अभियान को और असरदार तरीके से चलाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी मंदार पत्की ने जिले में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जरूरी सूचनाएं दीं और कहा कि शिक्षा आयुक्त के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

इसके बाद शिक्षा आयुक्त सचिंद्रप्रताप सिंह ने जिले के अलग-अलग स्कूलों को भेंट दी। स्कूलों में मौजूद सुविधाओं की जांच करते हुए उन्होंने कहा कि जहां शिक्षकों की कमी है, वहां स्कूल व्यवस्थापन समिति आगे आकर स्थानीय पढ़े-लिखे नागरिकों को स्वेच्छा से अस्थायी तौर पर पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करे। जो कमरा स्कूल में खाली पड़ा हो, उसे अभ्यासिका (स्टडी रूम) में बदल दिया जाए, ऐसे निर्देश भी उन्होंने दिए।

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