गोकुळ दूध संघ चुनाव: 25 सीटों के लिए 18 अक्टूबर को वोटिंग, 19 को नतीजे
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ यानी गोकुळ के संचालक मंडल की पंचवार्षिक चुनाव प्रक्रिया शुरू, उम्मीदवारी से लेकर वोटिंग तक की पूरी टाइमलाइन तय।
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कोल्हापुर जिले की सहकारिता और राजनीति में अहम माने जाने वाले गोकुळ दूध संघ यानी कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ के चुनाव का बिगुल बज गया है। संघ के संचालक मंडल की 25 सीटों के लिए अगले पांच साल तक कौन काबिज रहेगा, इसका फैसला अब वोटरों के हाथ में होगा। चुनाव निर्णय अधिकारी और उपविभागीय अधिकारी मौसमी चौगुले ने बुधवार, 9 सितंबर को चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी।
चौगुले के मुताबिक 18 अक्टूबर को वोटिंग होगी और उसके अगले ही दिन, 19 अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। इसी दिन साफ हो जाएगा कि अगले पांच साल गोकुळ पर किसका वर्चस्व रहने वाला है।
उम्मीदवारी फॉर्म भरने का सिलसिला 15 सितंबर से शुरू होगा। इच्छुक उम्मीदवार 15, 16, 17, 21 और 22 सितंबर, इन पांच तारीखों में फॉर्म जमा कर सकेंगे। जमा हुए फॉर्मों की छानबीन 23 सितंबर को होगी। इसके बाद 25 सितंबर से 8 अक्टूबर के बीच उम्मीदवारों के पास अपना नाम वापस लेने का मौका रहेगा। नाम वापसी की मियाद खत्म होते ही मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम लिस्ट जारी की जाएगी और उन्हें चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे।
यानी पूरी टाइमलाइन इस तरह है: 15 सितंबर से फॉर्म भरना शुरू, 23 सितंबर को छानबीन, 25 सितंबर से 8 अक्टूबर तक नाम वापसी, 18 अक्टूबर को वोटिंग और 19 अक्टूबर को नतीजे।
अंतिम उम्मीदवार तय होते ही प्रचार में तेजी आने की उम्मीद है। गोकुळ सिर्फ दूध उत्पादकों का सहकारी संघ नहीं है, बल्कि कोल्हापुर जिले की सहकारिता में एक बड़ा सत्ता केंद्र माना जाता है। इसी वजह से इस चुनाव के नतीजों का असर सिर्फ सहकारिता क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि जिले के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ने वाला है।
चुनाव कार्यक्रम जाहीर होते ही राजनीतिक और सहकारिता क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। कौन से गुट साथ आएंगे, किसकी किसके साथ गठबंधन बनेगा और कौन से पैनल आमने सामने खड़े होंगे, इसे लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है।
गौरतलब है कि संचालक मंडल का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्राधिकृत अधिकारी मंडल की नियुक्ति की गई थी, जिसका उस वक्त सत्ताधारी गुट ने विरोध किया था। अब जब बाकायदा चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है, तो संघ पर वर्चस्व की राजनीतिक लड़ाई और तेज होने के आसार हैं।