गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:04 IST

एसटी निगम पर 4500 करोड़ की देनदारी बाकी, सरकार से 200 करोड़ के कर्ज का हिसाब भी मांगा

महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन निगम (एसटी) भारी आर्थिक संकट में है, वित्त विभाग ने सख्त रुख अपनाया।

एसटी निगम पर 4500 करोड़ की देनदारी बाकी, सरकार से 200 करोड़ के कर्ज का हिसाब भी मांगा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन निगम यानी एसटी पर इस महीने एक हजार 71 करोड़ रुपये की देनदारी का पहाड़ खड़ा हो गया है। इसी वजह से राज्य के वित्त विभाग ने निगम के आर्थिक कामकाज को लेकर सख्त रुख अपनाया है और पहले दिए गए 200 करोड़ रुपये के बिना ब्याज वाले कर्ज की वापसी सहित कई मुद्दों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। यह जानकारी महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी काँग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने बुधवार को दी।

बरगे के मुताबिक पिछले दो-तीन साल से एसटी निगम की करीब 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा की वैधानिक देनदारियां बकाया पड़ी हैं। इसमें कर्मचारियों के पीएफ और ग्रैच्युटी की करीब 3,000 करोड़ रुपये की रकम बाकी है। हाल ही में कर्मचारियों की वेतनवृद्धि का जो अंतर सरकार ने खुद मान लिया था, उसकी 480 करोड़ 53 लाख रुपये की रकम भी अभी तक एसटी को नहीं मिली है। इसके अलावा डीजल और स्पेयर पार्ट्स के लिए भी करीब 100 करोड़ रुपये देना बाकी है।

बरगे ने बताया कि एक तरफ निगम का संचित घाटा लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ कर्मचारियों की देनदारी, पीएफ-ग्रैच्युटी, डीजल, स्पेयर पार्ट्स और बाकी पेमेंट की बकाया रकम भी बढ़ती जा रही है। इसका सीधा असर एसटी के रोजाना के आर्थिक कामकाज पर और आगे चलकर वेतन देने की क्षमता पर भी पड़ रहा है।

एसटी कर्मचारियों के पूरे वेतन के लिए हर महीने 540 करोड़ रुपये चाहिए, लेकिन पर्याप्त फंड न होने की वजह से फिलहाल सिर्फ 330 करोड़ रुपये का नकद वेतन ही दिया जा रहा है। इस वजह से कर्मचारियों की बकाया रकम भारी मात्रा में जमा हो चुकी है। बरगे ने कहा, "बकाया का यह पहाड़ बढ़ता जा रहा है, इसलिए एसटी के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अगले महीने कर्मचारियों को नकद वेतन देने में भी दिक्कत आ सकती है।"

इसी बीच सरकार के वित्त विभाग ने एसटी निगम को दिए गए 200 करोड़ रुपये के बिना ब्याज वाले कर्ज की रकम अभी तक सरकार को वापस जमा क्यों नहीं की गई, इसका साफ साफ स्पष्टीकरण देने वाली रिपोर्ट मांगी है।

वित्त विभाग ने निर्देश दिया है कि अगर स्पेशल ऑडिट की रिपोर्ट मिल चुकी है तो उसे पेश किया जाए, साथ ही ऑडिट रिपोर्ट के साथ संबंधित प्रतिपूर्ति का पूरा ब्योरा अगले प्रस्ताव के साथ पेश करने को कहा गया है। डैशबोर्ड पर पिछले समय की रकम शामिल करने का काम अभी तक होता नहीं दिख रहा, इसलिए इसके लिए वित्त विभाग को जरूरी लॉगिन देने की सूचना भी दी गई है।

बरगे ने कहा कि वित्त विभाग ने एसटी के आर्थिक व्यवहार को लेकर सख्त भूमिका ली है। उन्होंने कहा, "सरकार से मिले 200 करोड़ रुपये के कर्ज की वापसी क्यों नहीं हुई, इसकी रिपोर्ट मांगना एक गंभीर बात है। एक तरफ संचित घाटा बढ़ रहा है और दूसरी तरफ देनदारी बकाया है। सरकार को इस गंभीर आर्थिक हालत में तुरंत दखल देने की जरूरत है।"

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