धाराशिव मेडिकल कॉलेज परिसर में बिना इजाजत पेड़ काटने का आरोप, कलेक्टर से शिकायत
धाराशिव के शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालय परिसर में पेड़ काटे जाने का आरोप लगाते हुए वरिष्ठ लिपिक ने जिलाधिकारी से जांच और कार्रवाई की मांग की है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
धाराशिव के शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व रुग्णालय के दफ्तर परिसर में बिना इजाजत पेड़ काटे जाने का आरोप लगा है। इस मामले में वरिष्ठ लिपिक रवी अंबादास जाधव ने देवानंद मोहोळे के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है। जाधव ने अपनी शिकायत में मांग की है कि घटनास्थल का मुआयना कर पंचनामा किया जाए और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
जाधव ने 9 सितंबर को जिलाधिकारी को दी शिकायत में बताया कि 18 अगस्त को कॉलेज परिसर में बिना इजाजत पेड़ काटे गए थे। शिकायत में यह भी पूछा गया है कि क्या इस पेड़-कटाई के लिए संबंधित वृक्ष प्राधिकरण से लिखित इजाजत ली गई थी या नहीं, इसकी जांच की जाए। शिकायत के साथ घटनास्थल की दो तस्वीरें भी लगाई गई हैं।
महाराष्ट्र (नागरी क्षेत्र) वृक्ष संरक्षण व संवर्धन अधिनियम, 1975 के तहत शहरी इलाके में कोई भी पेड़ काटने से पहले वृक्ष प्राधिकरण से पहले इजाजत लेना जरूरी है। इस कानून की धारा 8 में पेड़ काटने पर पाबंदियां लगाई गई हैं। इजाजत देते वक्त वृक्ष प्राधिकरण शर्तें तय कर सकता है, जैसे बदले में नए पेड़ लगाना और अन्य जरूरी बातें। इस कानून में खास बात यह है कि 'पेड़ काटना' सिर्फ पूरी तरह पेड़ गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पेड़ को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाना भी इसी दायरे में आता है। इसलिए यह देखना जरूरी है कि पेड़ का नुकसान किस तरह हुआ, न कि सिर्फ यह कि पेड़ पूरी तरह काटा गया या नहीं।
कानून की धारा 21(2) के मुताबिक वृक्ष प्राधिकरण की इजाजत के बिना काटा गया हर पेड़ अलग अपराध माना जाता है। इसलिए अगर जांच में शिकायत के आरोप सही साबित होते हैं, तो कितने पेड़ काटे गए, उनकी प्रजाति, उम्र, आकार और नुकसान किस तरह का हुआ, यह सब पंचनामे में दर्ज करना जरूरी होगा। धारा 21 के तहत दोष साबित होने पर सरकार द्वारा तय की गई पेड़ की कीमत के आधार पर हर अपराध के लिए जुर्माना लगाया जाता है, जो ज्यादा से ज्यादा एक लाख रुपये तक हो सकता है, साथ ही एक हफ्ते से लेकर एक साल तक की कैद भी हो सकती है। 2021 में हुए संशोधन के बाद जुर्माने की रकम पेड़ की कीमत से जोड़ी गई है।
इस शिकायत के बाद यह पड़ताल करना जरूरी होगा कि पेड़ वाकई काटे गए थे या नहीं, कितने पेड़ काटे गए, वे सरकारी जमीन पर थे या नहीं, वृक्ष प्राधिकरण से इजाजत ली गई थी या नहीं, और अगर ली गई थी तो उसकी शर्तों का पालन हुआ या नहीं। इसके लिए घटनास्थल का आधिकारिक मुआयना और पंचनामा जरूरी होगा। कानून के तहत वृक्ष अधिकारी या अधिकृत अधिकारी को सार्वजनिक जगह में जाकर जांच करने और कानून लागू करने का अधिकार है। पेड़ काटना रोकने के लिए वृक्ष अधिकारी, अधिकृत अधिकारी या पुलिस जरूरी कदम उठा सकते हैं।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच होना अभी बाकी है, और देवानंद मोहोळे की तरफ से इन आरोपों पर कोई सफाई सामने नहीं आई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि पेड़ काटना गैरकानूनी था या इसके लिए विधिवत इजाजत ली गई थी। अगर बिना इजाजत पेड़ काटने का आरोप कानूनी तौर पर साबित हो जाता है, तो महाराष्ट्र (नागरी क्षेत्र) वृक्ष संरक्षण व संवर्धन अधिनियम, 1975 की धारा 8 और धारा 21 के तहत कार्रवाई का मामला बन सकता है। इससे पहले भी महाराष्ट्र में इसी तरह के मामलों में धारा 8(1) और 21(1) के तहत कार्रवाई होने का न्यायालयीन रिकॉर्ड मौजूद है।