डफरीन अग्निकांड: जांच समिति ने रिपोर्ट सरकार को सौंपी, दोषी कौन अभी साफ नहीं
अमरावती के डफरीन अस्पताल के एसएनसीयू में लगी आग की जांच पूरी, रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अमरावती जिला स्त्री अस्पताल के नवजात शिशु आईसीयू यानी एसएनसीयू में २४ अगस्त को तड़के वेंटिलेटर में ब्लास्ट होने से आग लग गई थी। इस मामले की जांच के लिए बनी राज्य स्तरीय समिति ने अब अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। समिति ने सोमवार शाम मुंबई में स्वास्थ्य विभाग के सचिव को यह रिपोर्ट दी। लेकिन रिपोर्ट में क्या निकला, यह अभी सामने नहीं आया है। आग किस वजह से लगी, कहां-कहां चूक हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इन सवालों के जवाब अभी भी अंधेरे में हैं।
घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर फौरन अमरावती पहुंचे थे और उन्होंने राज्य स्तरीय जांच समिति बना दी थी। उन्होंने वादा किया था कि सात दिन के अंदर रिपोर्ट दे दी जाएगी। इसके बाद पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे भी घटना के एक हफ्ते बाद अमरावती आए थे और उन्होंने ऐलान किया था कि १ सितंबर को ही जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जाएगी और उसे सार्वजनिक भी किया जाएगा। मगर असल में रिपोर्ट स्वास्थ्य सचिव तक पहुंचने में ७ सितंबर लग गई, और वह अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई। इस बीच जिस दिन आग लगी उसी दिन यह बात सामने आई थी कि अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम काम नहीं कर रहा था। खास बात यह कि जो सिस्टम अपने आप चालू होना चाहिए था, वह मैनुअल मोड पर रखा हुआ था। इसके अलावा बिजली सप्लाई में तकनीकी खराबी की आशंका, फायर फाइटिंग सिस्टम कितना कारगर था, और फायर ऑडिट लंबे समय से पेंडिंग होने जैसे गंभीर सवाल भी उठे थे।
जांच में यह बात भी सामने आई कि डफरीन अस्पताल प्रशासन ने बार-बार पत्र लिखने के बावजूद बिजली विभाग ने फायर ऑडिट की प्रक्रिया तय समय में पूरी नहीं की। इसी वजह से आग लगने से पहले की सुरक्षा व्यवस्था, बिजली सिस्टम की हालत, फायर ऑडिट में हुई देरी और एसएनसीयू में लगे उपकरणों की देखभाल, ये सारी बातें जांच समिति के रडार पर रहीं।
सूत्रों के मुताबिक इन सभी बातों को जांच रिपोर्ट में शामिल किया गया है। समिति ने ठीक-ठीक किन खामियों पर उंगली उठाई है, किन अफसरों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की है, और हादसे की असली वजह क्या बताई है, यह सब रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही साफ होगा। जांच रिपोर्ट सरकार तक भले पहुंच गई हो, लेकिन सच्चाई अभी भी पर्दे के पीछे है। अब अमरावती के लोगों की नजर इस पर है कि सरकार यह रिपोर्ट कब सार्वजनिक करती है और उसके बाद किस पर कार्रवाई होती है।