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02:36 IST

चंद्रपुर के चिचपल्ली में विद्यार्थियों ने बांस से बनाई गणेश प्रतिमा, बांबू सप्ताह की शुरुआत

चंद्रपुर के चिचपल्ली स्थित बांस संशोधन केंद्र में विद्यार्थियों ने बांस से गणेशमूर्ति बनाकर पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव का संदेश दिया।

चंद्रपुर के चिचपल्ली में विद्यार्थियों ने बांस से बनाई गणेश प्रतिमा, बांबू सप्ताह की शुरुआत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चंद्रपुर के चिचपल्ली में बांस संशोधन व प्रशिक्षण केंद्र (बीआरटीसी) में इस बार गणेशोत्सव कुछ अलग अंदाज में मनाया गया। यहां के विद्यार्थियों ने पूरी तरह बांस से एक आकर्षक गणेश प्रतिमा तैयार की, जिसने चंद्रपुर जिले भर का ध्यान खींचा। इस पहल को नाम दिया गया 'बांबूटूबाप्पा'।

विद्यार्थियों ने विधिवत तरीके से इस बांस की गणेश प्रतिमा की स्थापना की। इसी के साथ केंद्र में 'विश्व बांस सप्ताह २०२६' का उत्साह के साथ शुभारंभ हो गया। यह पूरी कोशिश पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव का संदेश देने के लिए की गई थी।

महाराष्ट्र वन विभाग के इस बांस संशोधन व प्रशिक्षण केंद्र में 14 से 18 सितंबर तक 'विश्व बांस सप्ताह २०२६' आयोजित किया जा रहा है। सप्ताह के पहले ही दिन 'डिप्लोमा इन बांबू टेक्नॉलॉजी' के विद्यार्थियों ने मिलकर जो बांस की गणेशमूर्ति बनाई, वह सबके आकर्षण का केंद्र बनी रही।

बांस से यह पर्यावरणपूरक और कलात्मक गणेशमूर्ति बनाकर विद्यार्थियों ने परंपरा, पर्यावरण संवर्धन और आधुनिक बांस तकनीक का अनोखा मेल पेश किया। इस मूर्ति के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बांस का इस्तेमाल सिर्फ पारंपरिक चीजें बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग आधुनिक डिजाइन, कलाकृतियों, टिकाऊ उत्पादों और उद्यमिता में भी असरदार तरीके से किया जा सकता है।

इस पहल ने पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव की सोच को भी एक नया रूप दिया। प्रकृति के अनुकूल बांस का रचनात्मक इस्तेमाल कर विद्यार्थियों ने जो 'बांस का बाप्पा' बनाया, वह वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींच रहा था। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और मेहमानों ने विद्यार्थियों की इस रचनात्मकता और कौशल की खासतौर पर तारीफ की।

कार्यक्रम में बीआरटीसी के डायरेक्टर उमेश वर्मा, वनक्षेत्रपाल सतीश शेंडे, चिचपल्ली के सरपंच चंदन उचेकर और न्यू एरा क्लिनिक सोल्युशन के सचिन धात्रक मौजूद रहे। इनके अलावा बीआरटीसी के अधिकारी, स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी भी इस मौके पर उपस्थित थे।

इस दौरान मेहमानों ने कहा कि बांस को 'हरित सोना' कहा जा सकता है और बांस पर आधारित पर्यावरणपूरक उत्पाद, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार निर्माण और ग्रामीण उद्यमिता के जरिए टिकाऊ आर्थिक विकास को बड़ी रफ्तार मिल सकती है।

'विश्व बांस सप्ताह २०२६' के तहत तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, विद्यार्थियों के लिए गतिविधियां, प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम भी रखे गए हैं। यह सप्ताह 18 सितंबर को 'विश्व बांस दिवस' के खास कार्यक्रम के साथ खत्म होगा। इस साल के सप्ताह की थीम है 'बांबू फॉर द फ्यूचर - फ्रॉम ट्रैडिशन टू इनोवेशन', जिसका मकसद बांस पर रिसर्च, नई सोच, टिकाऊ आजीविका और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।

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