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00:25 IST

ब्रिक्स सम्मेलन: दिल्ली में पुतिन ने जी7 पर साधा निशाना, वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स आगे

नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए ब्रिक्स बिजनेस समिट में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने आर्थिक आंकड़ों के जरिए जी7 देशों को आईना दिखाया, वहीं मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात में अगली शिखर बैठक का न्योता भी दिया गया।

ब्रिक्स सम्मेलन: दिल्ली में पुतिन ने जी7 पर साधा निशाना, वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स आगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस समिट 2026 में दुनिया की अर्थव्यवस्था की एक नई और असली तस्वीर सामने आई। इस समिट को संबोधित करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के तथाकथित 'जी7' गुट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जो आंकड़े रखे, वो सिर्फ पश्चिमी देशों के घटते दबदबे की तरफ इशारा नहीं कर रहे थे, बल्कि यह भी साफ बता रहे थे कि दुनिया की आर्थिक कमान अब पूरब और विकासशील देशों के हाथ में जा रही है।

पुतिन ने अपने भाषण में पक्के आर्थिक आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में दुनिया के कुल जीडीपी में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा रही है। वहीं दूसरी तरफ, खुद को दुनिया की अर्थव्यवस्था का सरगना मानने वाले जी7 देशों की हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 29 फीसदी रह गई है।

बात सिर्फ जीडीपी की नहीं थी। पुतिन ने वैश्विक आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले पांच सालों में दुनियाभर में जो कुल आर्थिक तरक्की हुई है, उसमें आधे से ज्यादा हिस्सा ब्रिक्स देशों का है। इसकी तुलना में जी7 देशों का योगदान सिर्फ 18 फीसदी रहा। इन आंकड़ों से यह साफ हो जाता है कि दुनिया की तरक्की का इंजन अब जी7 से ब्रिक्स देशों की तरफ तेजी से खिसक रहा है।

जी7 देशों के पीछे छूटने की वजह बताते हुए पुतिन ने ब्रिक्स देशों की आबादी और घरेलू बाजार का खासतौर पर जिक्र किया। दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है। इतनी बड़ी आबादी की वजह से इन देशों में जबरदस्त रफ्तार वाले, जीवंत और लगातार बढ़ते घरेलू बाजार बने हैं। इसके अलावा ब्रिक्स देशों में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, भरपूर प्राकृतिक संसाधन और भारतीय कंपनियों जैसे स्थानीय उद्योगों का दुनियाभर में बढ़ता असर - यही इस गुट की कामयाबी की असली बुनियाद है। पुतिन के मुताबिक व्यापार और कारोबारी रिश्ते ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिश्तों की असली ताकत हैं और यही आज की वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद कर रहे हैं।

इसी बिजनेस समिट के मौके पर भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। यह बैठक करीब 45 मिनट चली, जिसमें भारत-रूस के द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के साथ-साथ मध्य-पूर्व में मौजूदा तनाव और उसका वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर पर गहराई से बातचीत हुई।

बैठक के बाद दोनों नेता एक ही गाड़ी में साथ बैठकर भारत मंडपम में लगी बड़ी औद्योगिक प्रदर्शनी देखने पहुंचे। इसी दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का औपचारिक न्योता दिया। पीएम मोदी ने यह न्योता बड़े सम्मान के साथ कबूल किया, जिससे साफ हो गया कि आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचने वाला है।

कुल मिलाकर, दिल्ली की यह ब्रिक्स समिट सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह दुनिया की अर्थव्यवस्था की नई दिशा तय करने वाली और पश्चिमी महाशक्तियों के दबदबे को चुनौती देने वाली ऐतिहासिक घटना बन गई।

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