गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:20 IST

ब्रिक्स समिट में बड़ा फैसला, बेंगलुरु का NIMHANS बनेगा मानसिक स्वास्थ्य का वैश्विक केंद्र

नई दिल्ली में हुए 18वें ब्रिक्स समिट में मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा ऐलान, बेंगलुरु के NIMHANS को मिली अहम जिम्मेदारी

ब्रिक्स समिट में बड़ा फैसला, बेंगलुरु का NIMHANS बनेगा मानसिक स्वास्थ्य का वैश्विक केंद्र तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुए 18वें ब्रिक्स समिट में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। समिट में सर्वसम्मति से मंजूर हुए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में इंटरनेशनल सहयोग बढ़ाने के लिए 'उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क' और एक स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर बनाने पर सहमति बनी है।

इस पूरे ग्लोबल नेटवर्क को मैनेज करने और उसमें तालमेल बिठाने की जिम्मेदारी बेंगलुरु स्थित मशहूर संस्था 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज' यानी NIMHANS को दी गई है। इसे इस नेटवर्क का मुख्य समन्वय केंद्र बनाया गया है।

घोषणापत्र में कहा गया है कि यह नया नेटवर्क ब्रिक्स के सदस्य देशों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा मंच की तरह काम करेगा। इस मंच के जरिए सदस्य देशों के बीच मानसिक स्वास्थ्य पर मिलकर रिसर्च करना, नई हेल्थ पॉलिसी पर चर्चा करना और सबूत पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य नीतियों को बढ़ावा देना मुमकिन हो पाएगा। इससे भारत, रूस, चीन, ब्राजील और साउथ अफ्रीका समेत सभी ब्रिक्स देशों के मेडिकल एक्सपर्ट्स को अपने अनुभव और बेहतरीन तरीके आपस में शेयर करने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिल गया है।

इस इंटरनेशनल नेटवर्क का काम ठीक से चले, इसके लिए हर ब्रिक्स सदस्य देश के एक्सपर्ट प्रतिनिधियों का एक खास ग्रुप बनाया जाएगा। यह ग्रुप प्राइमरी हेल्थ केयर सिस्टम में मानसिक स्वास्थ्य को स्थायी और व्यापक तौर पर शामिल करने के लिए साइंटिफिक और टेक्निकल सहयोग की रूपरेखा तय करेगा। "बैलेंस्ड पार्टिसिपेशन और साझा जिम्मेदारी" के सिद्धांत पर काम करते हुए यह ग्रुप यह भी तय करेगा कि ग्लोबल संकट, प्राकृतिक आपदा या महामारी के बाद पैदा होने वाले मानसिक तनाव से कैसे निपटा जाए।

घोषणापत्र में खासतौर पर बच्चों, किशोरों और आर्थिक-सामाजिक रूप से कमजोर तबकों पर ध्यान दिया गया है, जो मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। इन्हें समय पर, आसानी से और लगातार मानसिक मदद देने पर खास जोर दिया गया है। इसके अलावा गैर-संक्रामक बीमारियों यानी NCDs से पैदा होने वाली नई चुनौतियों को रोकने के लिए "स्वस्थ जीवनशैली के लिए ब्रिक्स मिशन" और "2026-2029 के लिए ब्रिक्स रोडमैप" की शुरुआत को सभी देशों ने पूरा समर्थन दिया है।

मॉडर्न इलाज के साथ-साथ पारंपरिक और इंटीग्रेटेड मेडिसिन यानी TCIM की अहमियत को देखते हुए ब्रिक्स हेल्थ ट्रैक के तहत एक एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप बनाने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया गया है। यह प्लेटफॉर्म मानसिक स्वास्थ्य और दूसरी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों और हर्बल प्रोडक्ट्स पर रिसर्च को कोऑर्डिनेट करने का काम करेगा। NIMHANS की अगुवाई में शुरू होने वाली यह पहल भारत के हेल्थ सेक्टर में बढ़ते ग्लोबल असर की एक बड़ी मिसाल मानी जा रही है।

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