गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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00:42 IST

बांबू उद्योग में नई संभावनाओं पर चंद्रपुर में वैश्विक बांबू सप्ताह में चर्चा

चंद्रपुर की वन प्रबोधिनी में जागतिक बांबू सप्ताह-2026 के दूसरे दिन अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक आर. एम. रामानुजम ने बांबू उद्योग के भविष्य पर विचार रखे।

बांबू उद्योग में नई संभावनाओं पर चंद्रपुर में वैश्विक बांबू सप्ताह में चर्चा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बांबू पर आधारित उद्योगों में आगे चलकर बहुत बड़ी संभावना है, और इस पूरे क्षेत्र के विकास के लिए वन विभाग, संशोधन संस्था, उद्योग, टेक्नोलॉजी क्षेत्र, किसान और स्थानीय समुदाय के बीच अच्छा तालमेल होना जरूरी है। यह बात अपर प्रधान मुख्य वनसंरक्षक आर. एम. रामानुजम ने चंद्रपुर में कही। उनके मुताबिक बांबू के विकास को सिर्फ लागवड़ और उत्पादन तक सीमित रखकर नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे टिकाऊ रोजगार, स्थानीय नौकरियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला जरिया मानना चाहिए।

रामानुजम यह बात 'बांबू फॉर द फ्यूचर फ्रॉम ट्रॅडिशन टू इनोवेशन' थीम पर आधारित 'जागतिक बांबू सप्ताह-2026' के दूसरे दिन चंद्रपुर वन प्रबोधिनी में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। यह सप्ताह 14 से 18 सितंबर के बीच आयोजित किया जा रहा है, जिसका मकसद बांबू को सिर्फ पारंपरिक इस्तेमाल तक सीमित न रखकर विज्ञान, संशोधन, आधुनिक टेक्नोलॉजी, टिकाऊ विकास, मूल्यवर्धन और नए इनोवेशन से जोड़ना है। दूसरे दिन के अलग-अलग सत्रों में वन विभाग के सीनियर अधिकारी, वैज्ञानिक, संशोधक, प्रोफेसर, उद्यमी और बांबू क्षेत्र के जानकारों ने मार्गदर्शन किया।

इस मौके पर बांबू संशोधन व प्रशिक्षण केंद्र, चिचपल्ली के डायरेक्टर तथा चंद्रपुर वन प्रबोधिनी के अपर संचालक (प्रशिक्षण) उमेश वर्मा, निरी नागपुर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. लाल सिंग, न्यू इरा क्लीन टेक सोल्युशन्स प्रा. लि., भद्रावती के सीनियर मैनेजर (स्ट्रॅटेजी) आयुष राज सिन्हा, एसएमएमसीए नागपुर के आर्किटेक्चर विभाग की प्रोफेसर डॉ. तारिका दगडकर, चंद्रपुर वन प्रबोधिनी के उपसंचालक विश्वनाथ चव्हाण, हनुमंत जाधव, अश्विनी जाधव, सत्र संचालक संभाजी गवळी व रामदास पुजारी, बीआरटीसी के वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश शेंडे तथा ज्ञान प्रबोधिनी इनोवेशन फाउंडेशन, पुणे के सीईओ वैभव मोगरेकर मौजूद थे।

अपनी शुरुआती बात में उमेश वर्मा ने जागतिक बांबू सप्ताह आयोजित करने के पीछे की सोच समझाई और बीआरटीसी के जरिए चलाए जा रहे अलग-अलग कार्यक्रमों की जानकारी दी। आयुष राज सिन्हा ने टिकाऊ बांबू विकास, आधुनिक टेक्नोलॉजी और उद्योग क्षेत्र में आगे मिलने वाले मौकों पर बात रखी। उनके मुताबिक संशोधन से विकसित होने वाली टेक्नोलॉजी को असली उद्योग और बाजार तक पहुंचाने के लिए एक कारगर कड़ी बनाना जरूरी है।

डॉ. लाल सिंग ने बांबू के जरिए पर्यावरण की दोबारा स्थापना और इकोसिस्टम को बचाने के विषय पर मार्गदर्शन किया। उन्होंने बताया कि पर्यावरण और आर्थिक जरूरतों में संतुलन बनाने के लिए बांबू का इस्तेमाल और असरदार तरीके से किया जा सकता है। ज्ञान प्रबोधिनी इनोवेशन फाउंडेशन के सीईओ वैभव मोगरेकर ने 'मूल्यवर्धन से बांबू को नई दिशा' विषय पर मार्गदर्शन किया।

इसके अलावा संजीवनी ॲग्रो मशिनरी, नागपुर के अनिल चौक, बिलासपुर की डॉ. गुंजन पाटील, नागालैंड के डॉ. भूपेश गिरीधरण और तेलंगाना के श्रवण कुमार चिवुकुला ने ऑनलाइन के जरिए बांबू क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग विषयों पर मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम का संचालन बीआरटीसी की पर्यवेक्षिका योगिता साठवणे और विभागप्रमुख सुमेध लिचडे ने किया। रिटायर्ड सहायक वनसंरक्षक रामदास पुजारी ने आभार माना। इस मौके पर डॉ. आंबेडकर कॉलेज, सरदार पटेल कॉलेज, सुशिलाबाई मामीदवार सोशल वर्क कॉलेज, जनता कॉलेज, एफईएस गर्ल्स कॉलेज और राजीव गांधी कॉलेज के टीचर और स्टूडेंट्स बड़ी संख्या में मौजूद थे। कार्यक्रम में शामिल हुए स्टूडेंट्स को इस मौके पर सर्टिफिकेट भी बांटे गए।

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