अर्जुनी-मोर के इंजीनियर की नौकरी के साथ पेड़ लगाने की मुहिम
महावितरण से गडचिरोली भेजे गए अमित शहारे साल भर बीज जमा कर घर पर पौधे तैयार करते हैं और छुट्टी के दिन जंगल में लगाते हैं।
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मन में पक्का इरादा और पर्यावरण के लिए कुछ करने की तड़प हो तो सरकारी नौकरी की जिम्मेदारी संभालते हुए भी प्रकृति की सेवा की जा सकती है, यह अर्जुनी-मोर के अमित शहारे ने अपने काम से दिखा दिया है। सरकारी नौकरी बखूबी निभाते हुए वे पिछले कई सालों से पेड़ लगाने और उनकी देखभाल का शौक पाल रहे हैं। खास तौर पर जंगल इलाके में फलदार पेड़ लगाने की उनकी यह मुहिम काफी तारीफ बटोर रही है।
अमित शहारे कुछ महीने पहले तक अर्जुनी-मोर में महावितरण में उपविभागीय अभियंता के पद पर काम कर रहे थे। अभी उनका प्रमोशन होकर वे गडचिरोली में अतिरिक्त कार्यकारी अभियंता, भरारी पथक के तौर पर तैनात हैं। सरकारी सेवा में व्यस्त रहते हुए भी उन्होंने पर्यावरण बचाने का अपना शौक नहीं छोड़ा है।
शहारे साल भर अलग-अलग फलों के बीज इकट्ठा करते रहते हैं। इन्हीं बीजों से वे अपने घर पर ही पौधे तैयार करते हैं और फिर बारिश के मौसम में तालुका के जंगल वाले इलाकों में इन्हें लगाते हैं। शनिवार-रविवार की छुट्टी के दिन वे खुद समय निकालकर पेड़ लगाने जंगल में जाते हैं। इस वजह से पेड़ लगाना अब उनके लिए सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गया है।
इसी मुहिम के तहत ६ सितंबर को अरततोंडी बस स्टेशन के पास के जंगल में करीब ५० अलग-अलग फलदार पौधे लगाए गए। इनमें हापूस, केशर, आम्रपाली जैसी आम की किस्मों के साथ जामुन और कई और फलदार पौधे शामिल थे। जंगल में फलदार पेड़ लगाने से आगे चलकर वन्यजीवों को प्राकृतिक तरीके से खाना मिलने में भी मदद मिलेगी।
इस पौधरोपण कार्यक्रम में अमित शहारे के साथ प्रशांत लाडे, प्रदीप खोब्रागडे, जितू नाकाडे, कु. अर्मिती शहारे, अद्विक शहारे, कु. अधिशा लाडे, कु. नायरा मेश्राम, प्रेशीत सांगोळे और कु. श्रावण्या सांगोळे भी शामिल हुए।
सिर्फ पेड़ लगा देना ही काफी नहीं, उनकी देखभाल और संवर्धन करते रहना भी उतना ही जरूरी है। सरकारी सेवा में रहते हुए भी वक्त निकालकर पर्यावरण बचाने में योगदान देने वाले अमित शहारे की यह मुहिम समाज के लिए वाकई प्रेरणा बन रही है। उनकी इन कोशिशों से पेड़ लगाने के साथ-साथ पर्यावरण बचाने की समझ भी समाज में फैलने में मदद मिल रही है।