गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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अमित शाह के बहुभाषिक महाराष्ट्र वाले बयान पर मनसे भड़की, इतिहास की किताब भेजने की बात कही

गृहमंत्री अमित शाह के महाराष्ट्र को बहुभाषिक राज्य बताने वाले बयान पर मनसे प्रवक्ता गजानन काले ने कड़ी नाराजगी जताई है।

अमित शाह के बहुभाषिक महाराष्ट्र वाले बयान पर मनसे भड़की, इतिहास की किताब भेजने की बात कही
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र में मराठी भाषा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र को बहुभाषिक प्रदेश बताया था, जिसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। मनसे प्रवक्ता गजानन काले ने अमित शाह के इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र एक मराठी भाषिक राज्य है, यह बात याद रखनी चाहिए।

काले ने कहा कि अमित शाह को महाराष्ट्र आकर मराठी का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि महाराष्ट्र मराठी भाषिक राज्य है। उन्होंने सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो संयुक्त महाराष्ट्र के आंदोलन का इतिहास बताने वाली किताब अमित शाह को भेजी जाएगी।

गजानन काले ने आगे कहा कि महाराष्ट्र को बहुभाषिक प्रदेश बताते समय मराठी लोगों और महाराष्ट्र के इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। उनका कहना था कि हिंदी भाषा सीखने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हिंदी के नाम पर मराठी भाषा पर हमला नहीं होना चाहिए।

काले ने साफ कहा कि जिसे हिंदी में काम करना है, वह हिंदी जरूर सीखेगा। लेकिन हिंदी भाषा सम्मेलन की आड़ में मराठी भाषा पर हमला करके महाराष्ट्र का अपमान करना महाराष्ट्र बर्दाश्त नहीं करेगा। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और दक्षिण के अन्य राज्यों का भी हवाला दिया और सवाल किया कि क्या अमित शाह इन राज्यों में जाकर भी इस तरह की बात कह सकते हैं। काले ने याद दिलाया कि संयुक्त महाराष्ट्र के आंदोलन की वजह से ही महाराष्ट्र राज्य बना था। इसलिए महाराष्ट्र की पहचान और मराठी भाषा की अहमियत समझने के लिए अमित शाह को संयुक्त महाराष्ट्र के इतिहास वाली किताब भेजी जाएगी, ऐसा गजानन काले ने कहा।

दूसरी तरफ, अमित शाह ने अपने भाषण में छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वराज्य, स्वभाषा और मराठी भाषा के योगदान का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि वे महाराष्ट्र की बहुभाषिक संस्कृति को प्रणाम करते हैं। शाह ने बताया कि महाराष्ट्र में मराठी के साथ कोंकणी, गुजराती, हिंदी, सिंधी, वारली जैसी कई भाषाओं का विकास हुआ है और उन सबका सम्मान होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिए जाने का भी जिक्र किया।

अमित शाह ने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि गुजरात में गुजराती भाषा बोली जाती है, हिंदी नहीं बोली जाती, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर काम करते समय उन्हें हिंदी समझने और बोलने की वजह से कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने स्वातंत्र्यवीर सावरकर द्वारा मराठी भाषा के शुद्धीकरण के लिए किए गए काम का भी उल्लेख किया और कहा कि भारत की हर भाषा को समृद्ध करने की जरूरत है। लेकिन इस बयान के बाद मनसे के आक्रामक रुख अपनाने से महाराष्ट्र के राजनीति में मराठी बनाम हिंदी भाषा का मुद्दा फिर से गरमाने के आसार हैं।

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