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02:37 IST

आश्रमशालाओं में एनीमिया जांच अभियान: डेढ़ महीने में 79,624 बच्चों की हीमोग्लोबिन टेस्ट

आदिवासी विकास विभाग के एनीमिया निवारण कार्यक्रम के तहत महाराष्ट्र की 204 आश्रमशालाओं और एकलव्य मॉडल स्कूलों में बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच पूरी हुई।

आश्रमशालाओं में एनीमिया जांच अभियान: डेढ़ महीने में 79,624 बच्चों की हीमोग्लोबिन टेस्ट
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र में सरकारी और अनुदानित आश्रमशालाओं के साथ-साथ एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में एनीमिया की दिक्कत को दूर करने के लिए आदिवासी विकास विभाग ने एक बड़ा हेल्थ चेकअप कैंपेन चलाया है। इसका नाम है एनीमिया निवारण कार्यक्रम। इस कैंपेन के तहत सिर्फ डेढ़ महीने के अंदर राज्यभर की 204 आश्रमशालाओं में पढ़ने वाले 79,624 बच्चों की हीमोग्लोबिन यानी HB जांच पूरी कर ली गई है।

इन 79,624 बच्चों में 37,919 लड़के और 41,705 लड़कियां शामिल हैं। अगर स्कूलों के हिसाब से देखें तो 149 सरकारी आश्रमशालाओं के 55,868 बच्चों, 48 अनुदानित आश्रमशालाओं के 22,420 बच्चों और 6 एकलव्य मॉडल स्कूलों के 1,336 बच्चों की जांच हुई है।

नागपुर जिले की बात करें तो यहां आदिवासी विकास विभाग ने अब तक 1,813 बच्चों का हीमोग्लोबिन लेवल चेक किया है। इनमें 2 सरकारी आश्रमशालाओं के 536 बच्चे और 5 अनुदानित आश्रमशालाओं के 1,295 बच्चे शामिल हैं। वहीं अमरावती डिवीजन में 2,898 बच्चों की जांच हुई, जिनमें 8 सरकारी आश्रमशालाओं के 1,885 और 3 अनुदानित आश्रमशालाओं के 1,013 बच्चे शामिल हैं।

इस पूरे अभियान के लिए आदिवासी विकास विभाग ने सिटिजन्स एसोसिएशन फॉर चाइल्ड राइट्स के साथ एक समझौता किया है। इसी समझौते के तहत आश्रमशालाओं में अनुसूचित जनजाति के बच्चों का हीमोग्लोबिन लेवल चेक किया जा रहा है। जांच में जिन बच्चों का एचबी लेवल कम पाया गया है, उन्हें पूरक आहार यानी एक्स्ट्रा पौष्टिक खाना देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उनकी सेहत सुधर सके।

आदिवासी विकास विभाग की आयुक्त लीना बनसोड ने कहा कि महाराष्ट्र की सरकारी और अनुदानित आश्रमशालाओं तथा एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों में पढ़ने वाले आदिवासी बच्चों की सेहत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि एनीमिया निवारण कार्यक्रम के जरिए बच्चों में रक्ताल्पता यानी एनीमिया की समस्या को गंभीरता से देखते हुए युद्ध स्तर पर यह जांच अभियान चलाया गया, और इसी वजह से महज डेढ़ महीने में 79,000 से ज्यादा बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच पूरी की जा सकी।

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