400 यूनिट बिजली बिल में महाराष्ट्र सबसे महंगा, सिक्किम से तीन गुना ज्यादा दर, रोहित पवार को शिकायत
महावितरण की दरों को लेकर शिष्टमंडल ने विधायक रोहित पवार से मुलाकात कर देशभर के राज्यों से तुलना पेश की और 15 दिन में राहत न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
देश के 28 राज्यों में महावितरण अपने घरेलू ग्राहकों से सबसे ज्यादा दर पर बिजली बेच रही है। किसी राज्य के मुकाबले यह दर तीन गुना तो किसी के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा बैठती है। इसके बावजूद हर साल घाटा दिखाकर बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव भी मर्क के सामने रखा जाता है।
अगर महाराष्ट्र में कोई घरेलू ग्राहक 400 यूनिट बिजली इस्तेमाल करता है तो उसका बिल करीब 4,821 रुपये आता है। इसी 400 यूनिट का बिल उत्तर प्रदेश में रहने वाले ग्राहक को सिर्फ 2,265 रुपये में मिल जाता है, यानी लगभग आधे दाम में।
राकां शरद पवार पार्टी के नेता वेदप्रकाश आर्य के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने विधायक रोहित पवार से मुलाकात की और महावितरण की इस कथित लूट को लेकर अलग-अलग राज्यों के बिजली बिल की तुलनात्मक जानकारी सौंपी। इस पर रोहित पवार ने भरोसा दिलाया कि वे यह मुद्दा विधानसभा में उठाएंगे।
शिष्टमंडल का दावा है कि जहां महाराष्ट्र में 400 यूनिट बिजली पर 4,821 रुपये वसूले जा रहे हैं, वहीं सिक्किम में इतनी ही बिजली का बिल केवल 1,420 रुपये आता है। यानी तुलना करें तो महाराष्ट्र में सिक्किम से तीन गुना से भी ज्यादा बिल ग्राहकों से लिया जा रहा है। यह दर घरेलू बिजली के फेज-वन की बताई गई है।
शिष्टमंडल के मुताबिक गोवा में 400 यूनिट बिजली का बिल 1,650 रुपये, अरुणाचल प्रदेश में 1,780 रुपये, हिमाचल प्रदेश में 1,980 रुपये, मिजोरम में 2,050 रुपये और तमिलनाडु में 2,210 रुपये आता है। इसके अलावा गुजरात में 2,380 रुपये, छत्तीसगढ़ में 2,510 रुपये, आंध्र प्रदेश में 2,720 रुपये, केरल में 2,890 रुपये और मध्य प्रदेश में 2,950 रुपये बिल होने का दावा किया गया। वहीं तेलंगाना में 3,150 रुपये, कर्नाटक में 3,410 रुपये, राजस्थान में 3,520 रुपये और पंजाब में करीब 3,850 रुपये बिल आने की बात कही गई।
शिष्टमंडल ने साफ चेतावनी दी है कि अगर महावितरण ने 15 दिनों के भीतर बिजली दरों में कमी नहीं की, तो नागपुर स्थित महावितरण के मुख्यालय का घेराव कर तीखा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस शिष्टमंडल में अभिषेक आर्य, शेखर पाटिल, तरुण रामदासानी, जीतू केवलरामानी, हरीश तैवानी और जगदीश खुशालानी समेत बड़ी संख्या में नागरिक और व्यापारी शामिल थे।