जळगाव: आईटीआई के सामने कचरा डिपो के विरोध में अभाविप का आंदोलन, प्रशासन का लिखित आश्वासन
जलगांव आईटीआई के सामने वाला कचरा डेपो हटाने के लिए अभाविप ने धरना आंदोलन किया, महापौर और आयुक्त ने घटनास्थल पर जाकर लिखित आश्वासन दिया
जळगाव में आईटीआई के सामने वाला कचरा डिपो हटाने के लिए आखिरकार स्टूडेंट्स को सड़क पर उतरना पड़ा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी अभाविप ने सीधे ठिय्या आंदोलन शुरू कर दिया, जिसके बाद कहीं जाकर महानगरपालिका प्रशासन की नींद टूटी। यह आंदोलन सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुआ था और दोपहर एक बजे तक स्टूडेंट्स वहीं बैठे रहे, नारे लगाते रहे और हाथों में तख्तियां लेकर खड़े रहे। इतना बड़ा आंदोलन देखकर आखिर में महापौर से लेकर आयुक्त तक सबको मौके पर आना पड़ा।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए महापौर दीपमाला काळे, उपमहापौर मनोज चौधरी, स्थायी समिति के सभापति डॉ. चंद्रशेखर पाटील, आयुक्त आदित्य जीवने, अतिरिक्त आयुक्त शोभा बाविस्कर, उपायुक्त निर्मला गायकवाड, शहर अभियंता योगेश बोरोले, आरोग्य विभाग के समीर बोरोले, साथ ही नगरसेवक विशाल भोळे और अरविंद देशमुख भी आईटीआई के सामने पहुंचे। इन सबने स्टूडेंट्स से बात की, उनकी दिक्कतें समझीं, तब जाकर माहौल थोड़ा शांत हुआ।
स्टूडेंट्स के हाथों में जो तख्तियां थीं उन पर लिखा था- स्वच्छ परिसर स्टूडेंट्स का अधिकार है, कचरा हटाओ आईटीआई बचाओ, महानगरपालिका एक घंटा यहां बैठकर दिखाए। इन नारों के साथ स्टूडेंट्स प्रशासन का विरोध कर रहे थे। रास्ते से गुजरने वाला हर कोई रुककर देख रहा था। आईटीआई के सामने इतना कचरा जमा हो जाता है कि स्टूडेंट्स के लिए वहां बैठना भी मुश्किल हो गया है। बदबू आती है और बीमारी फैलने का डर बना रहता है।
इस आंदोलन में प्रदेश मंत्री डॉ. वरुणराज नन्नवरे, महानगर मंत्री आर्यन भालशंकर, महानगर सहमंत्री मनोज कुंभार, ईश्वरी जोशी, स्नेहल महाजन, अमरसिंह राजपूत, वरद पंढरकर सहित अभाविप के कई कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद रहे।
आंदोलन के बाद आयुक्त आदित्य जीवने ने अभाविप को लेखी आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि टीबी सैनिटोरियम में नए कचरा ट्रांसफर सेंटर का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बाकी काम 30 दिन में पूरा किया जाएगा। अगर ठेकेदार ने काम में देरी की तो उसके और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नया सेंटर तैयार होने तक आईटीआई के पास वाला पुराना सेंटर चालू रहेगा, लेकिन उसकी साफ-सफाई बेहतर तरीके से की जाएगी। हाईवे किनारे कचरा फेंकने वाली हाथगाड़ियों पर कार्रवाई की जाएगी और आईटीआई परिसर की सफाई को लेकर संबंधित लोगों को नोटिस भी दी जाएगी, ऐसा आयुक्त ने बताया।
शुरुआत में आयुक्त ने डेढ़ महीने में काम पूरा कर यह कचरा डिपो बंद करने की बात कही थी, लेकिन स्टूडेंट्स इस पर राजी नहीं हुए। उन्होंने 15 दिन की मोहलत मांगी। तब महापौर दीपमाला काळे और उपमहापौर मनोज चौधरी ने बीच-बचाव किया। महापौर ने कहा कि यह मेरा ही वॉर्ड है, अगर एक महीने में यह स्पॉट बंद नहीं हुआ तो मैं खुद आपके साथ आंदोलन में बैठूंगी। यह पक्का भरोसा देकर वे लेखी आश्वासन देने को तैयार हुईं।
महापौर की इस बात के बाद स्टूडेंट्स ने एक चेतावनी देकर आंदोलन वापस लिया। उन्होंने कहा कि 30 दिन में यहां का कचरा नहीं हटा तो 31वें दिन यह सारा कचरा हम सीधे महानगरपालिका में ले जाकर डाल देंगे।
आंदोलन के बाद उपमहापौर मनोज चौधरी ने तुरंत एक मीटिंग बुलाई और टीबी सेंटर वाली रैंप के काम का जायजा लिया। एक महीने में रैंप का काम पूरा कर कचरा डिपो हमेशा के लिए वहां शिफ्ट करने का फैसला हुआ है। चौधरी ने शहर अभियंता योगेश बोरोले, प्रोजेक्ट इंजीनियर योगेश वाणी और पीएमसी के अधिकारियों को कल से ही काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इस मीटिंग में नगरसेवक अमर जैन भी मौजूद थे। अब देखना यह है कि एक महीने में सच में यह कचरा डिपो हटता है या नहीं।