वसई किल्ला जेट्टी पर विसर्जन के बाद गणेश मूर्तियों के टूटे अवशेष मिले, नाराजगी
वसई किल्ला जेट्टी इलाके में विसर्जन के बाद किनारे पर गणेश मूर्तियों के टूटे हुए अवशेष मिलने से भाविकों में नाराजगी है, पुलिस और पालिका ने सफाई कर सतर्कता बरतने की बात कही।
वसई किल्ला जेट्टी के आसपास गणेश विसर्जन के बाद किनारे पर मूर्तियों के अवशेष टूटी हुई हालत में पड़े मिले। कुछ मूर्तियां आधी-अधूरी विसर्जित हालत में चिखल में फंसी हुई भी दिखीं। इस वजह से भाविकों की भावनाएं आहत हुई हैं, और विसर्जन के इंतजाम को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
हर साल की तरह इस बार भी वसई इलाके के अलग-अलग विसर्जन घाटों पर बड़ी संख्या में गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों की तादाद ज्यादा है। समुद्र में आने वाली भरती-ओहोटी, लहरों और चिखल की वजह से कुछ मूर्तियां किनारे या उथले पानी में वापस बाहर आ जाने का खतरा रहता है।
वसई की सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सौरभी पवार ने बताया कि महापालिका के अफसरों को इस बारे में सूचना दी गई थी, और रात को गणेश मूर्तियों का विसर्जन देर से समुद्र के बीचोंबीच किया गया। यह पूरी प्रक्रिया खत्म होने तक पुलिस बंदोबस्त तैनात रखा गया था।
सहायक आयुक्त संगीता घाडीगावकर के मुताबिक, भरती-ओहोटी की वजह से ये मूर्तियां बाहर आ गई थीं। जानकारी मिलते ही इन मूर्तियों को कब्जे में लेकर दोबारा विसर्जित किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार विसर्जन के वक्त और सतर्कता बरती जाएगी।
गणेशोत्सव में विसर्जन के बाद संबंधित यंत्रणा को जेट्टी और किनारे के इलाके का मुआयना कर बाहर आई मूर्तियों के अवशेष तुरंत हटाना चाहिए, ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है। श्रद्धा से और विधिवत तरीके से विदा किए गए गणपति की मूर्ति की इस तरह विटंबना न हो, इसके लिए विसर्जन का इंतजाम और सख्त करने की मांग शिवसेना उबाठा गुट के दत्ता जाधव ने की है। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित यंत्रणा ने मूर्तियों के अवशेष कब्जे में लेकर उन्हें दोबारा समुद्र में विसर्जित किया, ऐसी जानकारी दी गई है। प्रशासन ने यह भी साफ किया कि अगले विसर्जन के वक्त और सतर्कता बरती जाएगी।
विसर्जन के बाद निर्माल्य, मूर्तियों के अवशेष और बाकी पूजा सामग्री समुद्र किनारे या चिखल में पड़ी न रहे, इसके लिए अलग और असरदार यंत्रणा खड़ी करने की मांग स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने की है। खासकर प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों को घुलने में काफी वक्त लगता है, इसलिए उनके अवशेष समुद्र किनारे पड़े रहने से पर्यावरण पर भी असर पड़ने की आशंका है।