वर्गीस कुरियन पुण्यतिथि: भारत को दूध के मामले में आत्मनिर्भर बनाने वाले श्वेत क्रांति के जनक को याद किया गया
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भारत को दूध के मामले में आत्मनिर्भर बनाने वाले वर्गीस कुरियन की आज पुण्यतिथि है। दुनियाभर में उन्हें भारत में श्वेत क्रांति के जनक के तौर पर जाना जाता है। उनका जन्म 26 नवंबर 1921 को हुआ था और उनका निधन 2012 में हुआ था। इतने साल बीत जाने के बाद भी दूध और डेयरी क्षेत्र में काम करने वाले लोग आज भी उनका नाम बड़े सम्मान से लेते हैं।
कुरियन की दूरदृष्टि से ही आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड यानी अमूल नाम की सहकारी संस्था की शुरुआत हुई थी। इसी सहकार आंदोलन ने आगे चलकर पूरे देश में दूध उत्पादन की तस्वीर बदल दी और भारत को इस मामले में खुद पर निर्भर बना दिया। पहले जहां देश को दूध की कमी झेलनी पड़ती थी, वहीं इस आंदोलन के बाद हालात पूरी तरह बदल गए।
उन्होंने ही ऑपरेशन फ्लड नाम का कार्यक्रम शुरू किया था, जो दुनिया का सबसे बड़ा कृषि विकास कार्यक्रम माना जाता है। इसी कार्यक्रम की बदौलत भारत आगे चलकर दुनिया में दूध उत्पादन के मामले में नंबर वन देश बन गया। यह कार्यक्रम इतना बड़ा और असरदार था कि इसकी मिसाल आज भी कृषि और डेयरी क्षेत्र में दी जाती है।
किसानों को सीधे बाजार से जोड़ने का काम भी कुरियन की योजना का ही हिस्सा था। इससे बीच के दलालों की पूरी चेन टूट गई और किसानों को अपने दूध की सही कीमत मिलनी शुरू हुई। इसका सीधा फायदा गांव की अर्थव्यवस्था को मिला और वह पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई। जिन किसानों को पहले बिचौलियों की वजह से सही दाम नहीं मिल पाता था, उन्हें कुरियन की इस योजना से बहुत राहत मिली।
देश की सेवा के लिए दिए गए उनके योगदान को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा था। इसके अलावा भी उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे, जो उनके काम की अहमियत को दिखाते हैं।
कुरियन की पूरी जिंदगी बेहद सादगी से गुजरी। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा को समर्पित कर दिया था। उनके काम की वजह से करोड़ों किसानों के घरों तक खुशहाली पहुंची, यही वजह है कि आज भी उन्हें दूध और डेयरी क्षेत्र में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है। उनकी कहानी आज भी नई पीढ़ी को सहकार और मेहनत के जरिए बदलाव लाने की प्रेरणा देती है।