गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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UPI यूजर्स को राहत, केंद्र ने साफ किया कौन से लेनदेन पर नहीं लगेगा एक रुपया भी चार्ज

केंद्र सरकार ने पीआईबी के जरिए बयान जारी कर UPI चार्ज को लेकर फैली अफवाहों पर विराम लगाया।

UPI यूजर्स को राहत, केंद्र ने साफ किया कौन से लेनदेन पर नहीं लगेगा एक रुपया भी चार्ज
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

UPI से पेमेंट करने वालों के मन में चार्ज को लेकर जो अफवाहें फैल रही थीं, उन पर केंद्र सरकार ने एक बयान जारी करके पूरी तरह विराम लगा दिया है। पीआईबी दिल्ली की तरफ से जारी प्रेस नोट में साफ कहा गया है कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यानी P2P तरीके के सारे UPI लेनदेन आगे भी एक रुपया भी चार्ज लिए बिना, पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

इसके अलावा छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों का ध्यान रखते हुए करीब 96 प्रतिशत मर्चंट ट्रांजैक्शन यानी P2M लेनदेन भी पूरी तरह फ्री ही रहेंगे। यह नया नियम सिर्फ ज्यादा रकम वाले बड़े कारोबारी लेनदेन पर ही लागू किया गया है।

क्या-क्या पूरी तरह मुफ्त रहेगा, यह समझ लीजिए। सबसे पहले सारे P2P लेनदेन - दोस्त हो, रिश्तेदार हो या कोई भी व्यक्ति, कितनी भी रकम का UPI ट्रांजैक्शन करें, कोई ट्रांजैक्शन चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस या कोई और छुपा हुआ चार्ज नहीं लगेगा। कुल UPI वैल्यू का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा इसी कैटेगरी में आता है, तो वह MDR के दायरे से पूरी तरह बाहर है।

दूसरा, 2,000 रुपये तक के मर्चंट लेनदेन। किसी भी दुकान या व्यापारी को किया गया 2,000 रुपये तक का पेमेंट फ्री रहेगा, इससे ग्राहकों पर कोई एक्स्ट्रा बोझ नहीं पड़ेगा। तीसरा, छोटे व्यापारियों को खास संरक्षण दिया गया है - रेहड़ी-पटरी वाले, सब्जी बेचने वाले और छोटी दुकानों को राहत मिलेगी। जिनकी महीने भर की UPI क्यूआर कोड कमाई 1 लाख रुपये तक है, उन्हें 'जीरो-MDR' के तहत पूरी छूट मिलेगी।

अब बात करें किन लेनदेन पर MDR चार्ज लगेगा। 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चंट लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की मामूली दर से MDR लिया जाएगा। लेकिन 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के बड़े लेनदेन पर यह फीस अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगी। रेलवे, टेलीफोन, बीमा, ईंधन और कृषि सामान जैसी कम मुनाफे वाली और जरूरी सेवाओं में 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर सीधे 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन की तय दर लागू होगी। म्यूचुअल फंड, शेयर, स्टॉकब्रोकर्स और डीलर्स से जुड़े लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

सरकार ने साफ किया है कि MDR एक व्यावसायिक व्यवस्था के अंदर का चार्ज है और यह ग्राहकों से वसूला नहीं जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि व्यापारी यह खर्च ग्राहकों पर न डालें। साथ ही UPI ऐप्स को प्लेटफॉर्म फीस या कोई भी छुपा चार्ज लगाने की सख्त मनाही है। यूजर्स के लिए कोई मासिक लिमिट या ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई बंधन नहीं होगा। बैंकों की तरफ से तय 1 लाख से 5 लाख रुपये की रोजाना लिमिट सिर्फ सुरक्षा के लिए है, इसका चार्ज से कोई लेना-देना नहीं है।

मिले आंकड़ों के मुताबिक, देश भर के कुल मर्चंट लेनदेन में से सिर्फ 4 प्रतिशत लेनदेन पर ही इस MDR का असर पड़ेगा। बाकी 96 प्रतिशत लेनदेन या तो 2,000 रुपये के अंदर हैं या छोटे व्यापारियों की कैटेगरी में आते हैं, इसलिए वे पूरी तरह फ्री रहेंगे।

जमा होने वाली कुल MDR रकम में से 5 प्रतिशत हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जाएगा। इस फंड का इस्तेमाल गांव और कस्बों में UPI का प्रसार बढ़ाने और छोटे व्यापारियों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के लिए किया जाएगा।

यह फैसला 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007' के तहत UPI स्टीयरिंग कमेटी की गहन चर्चा के बाद लिया गया है। MDR सरकार या NPCI का कोई टैक्स या रेवेन्यू नहीं है, बल्कि यह बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच बांटा जाएगा। इससे UPI का डिजिटल ढांचा और मजबूत होगा। यह फैसला फाइनेंस पर बनी संसदीय समिति की 32वीं रिपोर्ट की सिफारिशों के मुताबिक ही लिया गया है।

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