ट्रम्प का ऐलान: दोबारा सत्ता मिली तो हर अमेरिकी को मिलेंगे 5000 डॉलर, भारत में योजनाओं से हो रही तुलना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा ऐलान किया, सोशल मीडिया पर भारतीय योजनाओं से जुड़े मीम्स की बाढ़ आ गई।
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने ऐलान किया है कि अगर संसद में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा बरकरार रहा तो हर वयस्क अमेरिकी नागरिक के खाते में 5,000 डॉलर यानी भारतीय रुपयों में करीब साढ़े चार लाख से ज्यादा रकम 'ट्रम्प डिविडेंड' के नाम से जमा की जाएगी। इस ऐलान ने अमेरिका में तो हलचल मचाई ही, भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस पर मजेदार तरीके से रिएक्ट करते हुए पूरे मामले को अलग ही मोड़ दे दिया।
दरअसल लोग अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ऐलान की तुलना महाराष्ट्र की 'मुख्यमंत्री मेरी लाडली बहन योजना' और मध्य प्रदेश की 'लाडली बहना योजना' से करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर 'लाडला अमेरीकी योजना', 'लाडला अडल्ट योजना' और 'ग्लोबल लाडली बहना' जैसे हैशटैग और मीम्स की झड़ी लग गई है। एक तरफ अमेरिका जैसे विकसित देश में चुनाव से पहले सीधे बैंक खाते में पैसे डालने के इस ऐलान की चर्चा हो रही है, तो दूसरी तरफ भारत की राजनीतिक संस्कृति और 'रेवड़ी राजनीति' अब दुनिया भर में किस तरह चर्चा में है, यह भी सामने आया है।
टेक्सास के डलास शहर में हुए रिपब्लिकन पार्टी के पहले मिडटर्म कन्वेंशन में ट्रम्प ने यह चुनावी कार्ड खेला। डेढ़ घंटे से लंबे भाषण में उन्होंने साफ कहा कि अगर नवंबर के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों सदनों पर अपना कंट्रोल बनाए रखती है, तो देश के हर वयस्क नागरिक को 5,000 डॉलर का 'ट्रम्प डिविडेंड' दिया जाएगा। इस योजना का फायदा करीब 27 करोड़ वयस्क अमेरिकी नागरिकों को मिल सकता है, और पूरे प्रस्ताव पर करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है, जो अमेरिका की कुल जीडीपी का करीब 3 फीसदी है। यह योजना आखिर कैसे लागू होगी, इस पर अभी कोई साफ जानकारी नहीं है, और इतनी बड़ी रकम एक साथ बांटना कानूनी और आर्थिक रूप से कितना मुमकिन है, इस पर अर्थशास्त्री सवाल उठा रहे हैं।
दरअसल रिपब्लिकन पार्टी इस वक्त बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। पिछले कुछ महीनों में बढ़ती महंगाई, खर्चे में बढ़ोतरी और ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे टकराव की वजह से जनता में नाराजगी है। सर्वे बताते हैं कि ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग अभी ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है, जबकि डेमोक्रेट वोटर चुनाव को लेकर ज्यादा उत्साहित नजर आ रहे हैं। रिपब्लिकन पार्टी को संसद पर अपना कंट्रोल खोने का डर सता रहा है, यही वजह मानी जा रही है कि ट्रम्प ने यह दांव खेला है।
ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 'ग्लोबल लाडली बहन योजना', 'लाडला अमेरिकन भाई योजना' जैसे नामों से पोस्ट वायरल हो रही हैं। एक यूजर मोहम्मद मोबिन ने एक्स पर लिखा, "scheme so goated, Ladli bhen Yojna reached international"। वहीं संदीप मनुधने नाम के यूजर ने लिखा, "Laadla Ameriki scheme launched।" एक अन्य यूजर वीटी ने लिखा, "Trump following Modi with ladla Amreecan yojna।"
डलास कन्वेंशन में ट्रम्प ने समर्थकों से कहा, "समझो मैं ही बैलेट पर हूं।" हालांकि इस कन्वेंशन में सब कुछ ठीक नहीं रहा। ट्रम्प के साथ जुड़ाव से स्थानीय चुनावों पर बुरा असर पड़ने के डर से कई बड़े रिपब्लिकन नेता इस आयोजन से दूर रहे, जिनमें मिशिगन के टॉम बैरेट, अलास्का के डैन सुलिवन और मेन की सुसान कॉलिन्स शामिल हैं। इससे पार्टी के अंदर मतभेद भी खुलकर सामने आ गए हैं।
भारत में जब कोई राजनीतिक पार्टी मुफ्त बिजली, पानी या महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने का वादा करती है, तो उसे अक्सर 'रेवड़ी संस्कृति' कहकर आलोचना का शिकार बनाया जाता है, जबकि अमेरिका जैसा देश जब सीधे नकद बांटने की सियासत करता दिख रहा है, तो भारतीय यूजर्स के लिए इस पर मीम्स बनाना स्वाभाविक ही है।