गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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05:58 IST

रूस भारत को दे सकता है 6000 किमी रेंज वाला वोरोनेझ-एम रडार, चित्रदुर्ग में लगाने की तैयारी

रूस और भारत की डिफेंस पार्टनरशिप में एक नया मोड़ आया है, पुतिन ने वोरोनेझ-एम रडार सिस्टम का प्रस्ताव दिया है।

रूस भारत को दे सकता है 6000 किमी रेंज वाला वोरोनेझ-एम रडार, चित्रदुर्ग में लगाने की तैयारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स में भारत और रूस की डिफेंस पार्टनरशिप एक बार फिर एक नए और बहुत अहम मोड़ पर पहुंच गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को सिर्फ सुखोई-57 (Su-57) स्टेल्थ फाइटर जेट्स, एस-400 (S-400) मिसाइल सिस्टम और अकुला-क्लास (Akula-class) न्यूक्लियर सबमरीन का ऑफर नहीं दिया, बल्कि अपने आर्सेनल में सबसे ताकतवर मानी जाने वाली 'वोरोनेझ-एम' (Voronezh-M) स्ट्रैटेजिक अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम की भी पेशकश की है। डिफेंस सर्कल में इस रडार सिस्टम को रूसी हवाई सुरक्षा का 'ब्रह्मास्त्र' कहा जाता है, क्योंकि इससे दुश्मन की कोई भी हरकत हजारों किलोमीटर दूर से ही पकड़ में आ जाती है।

रूस की मशहूर कंपनी अल्माझ-अंते (Almaz-Antey) की बनाई इस रडार को कर्नाटक के चित्रदुर्ग में लगाने का करार एडवांस स्टेज में बातचीत के दौर से गुजर रहा है। यह डील करीब 4 अरब डॉलर की है, और अगर यह फाइनल हो जाती है तो भारत को स्पेस और ऊपर से आने वाले खतरों की पहले से जानकारी देने वाली एक जबरदस्त ताकत मिल जाएगी।

इस रडार सिस्टम की असली ताकत इसमें इस्तेमाल हुई एडवांस्ड फेज्ड-अरे (Phased-Array) तकनीक में छिपी है। पुरानी पीढ़ी के 'द्नेप्र' (Dnepr) या 'दार्याल' (Daryal) जैसे रडार सिस्टम में बड़े-बड़े मैकेनिकल इक्विपमेंट की जरूरत पड़ती थी। लेकिन वोरोनेझ सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक बीम के जरिए सेकंड के कुछ ही हिस्से में अपनी नजर पूरी दिशाओं में घुमा सकती है। यह रडार साइज में बहुत कॉम्पैक्ट है, बिजली भी कम खर्च करती है और कम टाइम में खड़ी की जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी 6,000 से 8,000 किलोमीटर तक की जबरदस्त रेंज। यह रडार एक साथ सैकड़ों टारगेट्स को ट्रैक कर सकता है, वो चाहे स्पेस के सैटेलाइट हों, ऊंचाई से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हों या जमीन के करीब उड़ने वाली क्रूज मिसाइलें, यह रडार पल भर में इनका पता लगा लेता है।

भारतीय वायुसेना के पूर्व पायलट और एविएशन एक्सपर्ट विजयेंद्र के. ठाकूर के एनालिसिस के मुताबिक, अगर वोरोनेझ रडार सिस्टम को भारत के साउथ हिस्से यानी कर्नाटक के चित्रदुर्ग में लगाया जाता है, तो भी यह पूरे पाकिस्तान का एयरस्पेस और चीन का आधे से ज्यादा भूभाग अपनी निगरानी में ले लेगा। चीन और पाकिस्तान की तरफ से अचानक होने वाले संभावित बैलिस्टिक या हाइपरसॉनिक मिसाइल हमलों की पहले से चेतावनी भारत को कुछ मिनट पहले ही मिल जाएगी। इससे भारत के एस-400 (S-400) और देसी 'एडवांस एयर डिफेंस' (AAD) मिसाइल सिस्टम्स को दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही तबाह करने के लिए पूरा टाइम मिल जाएगा। इसके अलावा, अमेरिका के 'पेव पॉज' (PAVE PAWS) सिस्टम की तरह यह सिस्टम हिंद महासागर में समुद्री हरकतों पर भी बारीक नजर रखने में मदद करेगा।

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