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04:24 IST

पशु डॉक्टर से संघ प्रमुख तक: मोहन भागवत ने मनाया 76वां जन्मदिन

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत आज 76 साल के हो गए, चंद्रपुर में जन्म से लेकर 2009 में संघ की कमान संभालने तक का सफर।

पशु डॉक्टर से संघ प्रमुख तक: मोहन भागवत ने मनाया 76वां जन्मदिन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। 11 सितंबर 1950 को महाराष्ट्र के चंद्रपुर में जन्मे भागवत आज 11 सितंबर 2026 को 76 साल के हो गए।

उनका बचपन और शुरुआती पढ़ाई-लिखाई नागपुर में हुई। पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान की डिग्री ली और कुछ वक्त तक वेटरनरी डॉक्टर का काम भी किया। मगर बाद में उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी RSS के काम को दे दी।

संघ से जुड़ने के बाद भागवत ने संगठन में अलग-अलग स्तर पर कई जिम्मेदारियां संभालीं। स्थानीय काम से शुरुआत करके धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे और इस दौरान संघ के कामकाज और उसके विस्तार को बहुत करीब से देखा-समझा। इसी लंबे अनुभव की वजह से वे संघ के सबसे ऊपर के नेतृत्व तक पहुंच पाए।

साल 2009 में मोहन भागवत को RSS का सरसंघचालक बनाया गया। उन्होंने के.एस. सुदर्शन के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। तब से लेकर आज तक वे लगातार संगठन की राष्ट्रीय अगुवाई करते आ रहे हैं। उनके इस कार्यकाल में संघ की गतिविधियां कई क्षेत्रों में फैली हैं। वे संगठन से जुड़े मसलों के अलावा सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखते रहे हैं।

उनके भाषणों में अक्सर सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण, आत्मनिर्भरता और भारतीय संस्कृति जैसे विषय सुनने को मिलते हैं। संघ प्रमुख के तौर पर वे अपने कार्यकर्ताओं और अलग-अलग सामाजिक तबकों के बीच बातचीत बढ़ाने पर भी जोर देते रहे हैं। समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच मेलजोल और सहयोग को वे राष्ट्र निर्माण के लिए बेहद जरूरी मानते हैं।

संघ के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के लिए भागवत का जन्मदिन एक खास दिन माना जाता है। इस मौके पर देशभर से उन्हें बधाइयां मिलती हैं और लोग संगठन में उनके लंबे योगदान तथा सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका को याद करते हैं।

चंद्रपुर और नागपुर से शुरू हुआ मोहन भागवत का यह सफर आज RSS के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुका है। पशु चिकित्सा जैसी पेशेवर पढ़ाई करने के बावजूद उन्होंने आगे चलकर संगठन के काम को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया। बरसों तक संघ में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाने के बाद 2009 में उन्हें संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। आज उनके जन्मदिन पर संघ से जुड़े कार्यकर्ता और समर्थक उनके सार्वजनिक जीवन, संगठन में उनके योगदान और सामाजिक मुद्दों पर उनकी लगातार सक्रिय भूमिका को याद कर रहे हैं।

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