पांच दिवस बैंकिंग वीक की मांग, वरना संप और तेज करेंगे: बैंक कर्मचारियों का ऐलान
सातारा जिले में बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग वीक और प्रोत्साहन भत्ते में इंसाफ की मांग को लेकर सांगली में जोरदार प्रदर्शन किया।
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पांच दिवस का बैंकिंग वीक तुरंत लागू किया जाए, कामकाज के आधार पर मिलने वाला प्रोत्साहन भत्ता बिना किसी भेदभाव के, इंसाफ से दिया जाए, बैंकों में पर्याप्त स्टाफ रखा जाए और कर्मचारियों-अधिकारियों की तमाम पेंडिंग मांगें जल्द पूरी की जाएं - इन मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों की संयुक्त संगठनों ने देश भर में आंदोलन का ऐलान किया था। इसी आवाहन पर अमल करते हुए सातारा जिले के बैंक कर्मचारी और अधिकारी बड़ी तादाद में सांगली में जमा हुए और जोरदार प्रदर्शन किया।
सांगली में हुए इस आंदोलन में सातारा जिले की अलग-अलग बैंक यूनियनों के पदाधिकारी, अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। "पांच दिवस का बैंकिंग वीक लागू करो, इंसाफ से प्रोत्साहन भत्ता दो, बैंकों में पर्याप्त स्टाफ दो" - इन नारों से पूरा प्रदर्शन स्थल गूंज उठा। इस दौरान साफ चेतावनी दी गई कि अगर सरकार और बैंक मैनेजमेंट ने पेंडिंग मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस प्रदर्शन में बैंक ऑफ महाराष्ट्र कर्मचारी संगठन के ब्रह्मानंद गुजर, विकास निकम, महेश जगताप, विजय लवटे, शैलेश गायकवाड, अधिकारी संगठन के मेहबूब मगदूम, ओंकार बर्वे, आईडीबीआई बैंक के लोहार, भारतीय स्टेट बैंक के सागर नेवसे, बैंक ऑफ इंडिया के प्रसाद, केनरा बैंक के चिंचकर, बैंक ऑफ बड़ौदा के राहुल लोखंडे, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक के अमोल जगताप, मयूर कदम, संकेत पवार, मनीषा चव्हाण और एलआईसी के वसंतराव नलावडे समेत अलग-अलग बैंक यूनियनों के पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
मार्च 2024 में हुए वेतन समझौते में बचे हुए शनिवार की छुट्टी लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके लिए सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम के घंटों में 40 मिनट की बढ़ोतरी करने पर भी यूनियनों ने मंजूरी दे दी थी। लेकिन इस फैसले को अब तक केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिली है, जिसकी वजह से यह मामला ढाई साल से ज्यादा वक्त से लटका पड़ा है। इसी वजह से बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों में गहरी नाराजगी है। आंदोलनकारियों का कहना था कि बैंक कर्मचारियों पर काम का बढ़ता बोझ, स्टाफ की कमी और काम व निजी जिंदगी के बीच बिगड़ता संतुलन देखते हुए पांच दिवस का बैंकिंग वीक अब वक्त की जरूरत बन गया है।
यह भी मांग रखी गई कि कामकाज के आधार पर मिलने वाला प्रोत्साहन भत्ता देते वक्त पारदर्शी, इंसाफभरा और भेदभाव रहित तरीका अपनाया जाए, ताकि कर्मचारियों और अधिकारियों के योगदान को सही मायने में सम्मान मिले। साथ ही यह भी कहा गया कि इस मुद्दे पर यूनियनों से बातचीत करके संतोषजनक फैसला लिया जाए।
प्रदर्शन में यह मांग भी उठी कि बैंकों में पर्याप्त संख्या में क्लर्क और मातहत स्टाफ की भर्ती की जाए, नई पेंशन स्कीम की जगह पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने पर फैसला लिया जाए, पेंशन में सुधार किया जाए, रिटायर कर्मचारियों के मेडिकल इंश्योरेंस का मसला हल किया जाए और ग्रेच्युटी समेत बाकी पेंडिंग मांगें पूरी की जाएं।
8 और 9 सितंबर 2026 को मुख्य श्रम आयुक्त और उप मुख्य श्रम आयुक्त की मौजूदगी में हुई सुलह बैठक में भी सरकार की तरफ से पांच दिवस के बैंकिंग वीक को लेकर कोई पक्की गारंटी नहीं मिली। यूनियन पदाधिकारियों ने बताया कि इसी वजह से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। इस दौरान चेतावनी दी गई, "सरकार और बैंक मैनेजमेंट को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की इंसाफभरी मांगों को गंभीरता से देखना चाहिए। पांच दिवस का बैंकिंग वीक, इंसाफभरा प्रोत्साहन भत्ता और बाकी पेंडिंग मांगों पर तुरंत पॉजिटिव फैसला लिया जाए, वरना यह संघर्ष और तेज कर दिया जाएगा।"
बैंक कर्मचारियों की संयुक्त संगठनों ने आंदोलन के अगले चरण के तहत 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को तीन दिन का देशव्यापी बैंक स्ट्राइक बुलाया है। इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से बेमियादी स्ट्राइक की चेतावनी भी दी गई है। सातारा जिले के बैंक कर्मचारी और अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी एकजुटता, अनुशासन और संगठित ताकत दिखा चुके हैं। संयुक्त बैंक कर्मचारी संगठनों की सातारा जिला इकाई की तरफ से कहा गया कि अगर सरकार ने पेंडिंग मांगों पर तुरंत पॉजिटिव फैसला नहीं लिया तो आने वाले वक्त में आंदोलन की धार और तेज होगी।