नागपुर की मारबत यात्रा में इस बार MPSC के भ्रष्टाचार पर बड़गा, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा
विदर्भ की मशहूर मारबत यात्रा हर साल तान्हा पोळा के दिन निकलती है, इस बार MPSC के भ्रष्ट कामकाज पर तंज कसने वाला खास बड़गा भी शामिल होगा।
नागपुर का मारबत उत्सव विदर्भ की सांस्कृतिक परंपरा में खास जगह रखता है और हर साल पूरे जोश के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार में लोकपरंपरा, समाज को संदेश देने वाली सोच और गलत रीति-रिवाजों के खिलाफ जागरूकता, तीनों का अनोखा मेल देखने को मिलता है। खासकर नागपुर शहर के मारबत जुलूस का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है। यह सिर्फ धार्मिक आस्था का मामला नहीं है, बल्कि बुरी सोच, बीमारी, अंधविश्वास, अन्याय और समाज की तमाम दिक्कतों के खिलाफ आवाज उठाने वाली लोकपरंपरा के तौर पर जानी जाती है। यह उत्सव बैलपोळा के बाद तान्हा पोळा के दिन मनाया जाता है, और विदर्भ के बाहर रहने वाले बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर यह मारबत उत्सव है क्या और इसकी सैकड़ों साल पुरानी परंपरा की कहानी क्या है।
मारबत का मतलब है एक बड़े आकार की प्रतीकात्मक मूर्ति या पुतला। नागपुर में मुख्य रूप से काली मारबत और पीली मारबत, इन दो मारबतों की परंपरा चली आ रही है। तान्हा पोळा के दिन इन दोनों मारबतों का जुलूस निकाला जाता है, जिसमें लोग "ले जा रे मारबत", "ईडा-पिडा ले जा" जैसे नारे लगाते हैं। इसके पीछे भावना यह है कि मारबत के साथ-साथ समाज की मुसीबतें, बीमारियां और बुरी सोच भी दूर चली जाएं। हाल के संदर्भों के मुताबिक नागपुर में यह परंपरा 145 साल से ज्यादा समय से चली आ रही है।
काली मारबत का इतिहास ब्रिटिश जमाने के नागपुर से जुड़ा बताया जाता है। कहा जाता है कि भोसले घराने की बाकाबाई ने अंग्रेजों से हाथ मिलाया था, उसी के विरोध में काली मारबत निकालने की परंपरा शुरू हुई। इसीलिए इसे अन्याय, बुरी सोच और जुल्म के खिलाफ प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग ऐतिहासिक संदर्भों के मुताबिक इस परंपरा की शुरुआत करीब 1880-1881 के आसपास हुई थी। वहीं पीली मारबत की परंपरा 1885 में जागनाथ बुधवारी इलाके के तऱ्हाणे तेली समाज ने शुरू की थी। पीली मारबत को देवी या लोगों की रक्षा करने वाली शक्ति का प्रतीक माना जाता है, इसीलिए इसे देखने के लिए महिलाओं और बच्चों की खूब भीड़ जुटती है।
मारबत जुलूस की एक बड़ी खासियत बड़गे होते हैं। बड़गे यानी कागज, बांस और घास से बनाए गए पुतले, जो अलग-अलग मुद्दों पर तंज कसते हैं। हर साल समाज के सामने जो भी अहम राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक सवाल होते हैं, उन पर बड़गे के जरिए समाज की तरफ से टिप्पणी की जाती है और अपनी बात रखी जाती है। जुलूस शहर से निकलने के बाद मारबत और बड़गों को जलाया जाता है। इसके पीछे संदेश यह है कि बुरी शक्तियां, गलत रीति-रिवाज, बीमारी और नकारात्मकता जल जाए और अच्छे विचारों का स्वागत हो। इसीलिए मारबत उत्सव सिर्फ एक जुलूस नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास, लोकपरंपरा और सामाजिक जागरूकता का अनोखा संगम है।
MPSC के भ्रष्ट और लापरवाह कामकाज को लेकर राज्यभर के युवाओं में इस समय गुस्सा है, यही वजह है कि कई शहरों में परीक्षार्थी MPSC के खिलाफ मोर्चे भी निकाल रहे हैं। नागपुर के मशहूर मारबत जुलूस में भी इस बार युवाओं का यह गुस्सा दिखने वाला है, क्योंकि यहां MPSC के भ्रष्ट कामकाज पर तंज कसने वाला एक खास बड़गा तैयार किया गया है। नागपुर के बिनाकी मंगळवारी इलाके में पोळा मैदान के पास रहने वाले युवाओं ने MPSC के भ्रष्ट कामकाज का मजाक उड़ाने वाला यह बड़गा बनाया है, जो मारबत जुलूस में शामिल होगा। आम घरों के युवा बड़ी मेहनत से MPSC जैसी परीक्षा की तैयारी करते हैं, लेकिन पेपर लीक होने की वजह से उनका भविष्य बर्बाद हो जाता है। इसीलिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले MPSC के भ्रष्ट अधिकारियों को "ले जा रे मारबत" का नारा लगाते हुए यह बड़गा मारबत जुलूस में नजर आएगा।