गुरूवार, 17 सितमबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
04:24 IST

कारगिल की स्टैंज़िन त्सांगयांग बनीं जिले की पहली महिला सेना अधिकारी

लद्दाख के कारगिल जिले की 24 साल की स्टैंज़िन त्सांगयांग भारतीय सेना में अफसर बनने वाली इलाके की पहली महिला बन गई हैं।

कारगिल की स्टैंज़िन त्सांगयांग बनीं जिले की पहली महिला सेना अधिकारी
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पहाड़ी इलाकों की जिंदगी बाकी जगहों से काफी अलग मानी जाती है, और बात जब देश के सबसे बर्फीले इलाके लद्दाख की हो तो मुश्किलें और चुनौतियां और बढ़ जाती हैं। इसी कठिन माहौल से निकली 24 साल की एक लड़की ने वो इतिहास रच दिया है जो आज तक उस इलाके से कोई नहीं कर पाया था। यह लड़की हैं स्टैंज़िन त्सांगयांग, जिन्होंने लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के कारगिल जिले से भारतीय सेना में पहली महिला अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है।

भारतीय सेना के आर्मी ट्रेनिंग कमांड ने स्टैंज़िन के इस प्रेरणादायक सफर की कहानी एक्स (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। सेना ने उनके इस सफर को "पर्वतों से ऑलिव ग्रीन तक: ऑफिसर कैडेट (महिला) स्टैंज़िन त्सांगयांग की कहानी" नाम दिया है।

सेना की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, स्टैंज़िन लद्दाख की जांस्कर घाटी में ऊंचे पहाड़ों और कड़ाके की ठंड के बीच पैदा हुईं और बचपन से ही उन्होंने सहनशीलता और मेहनत के सबक सीखे। परिवार में सबसे छोटी संतान होने की वजह से वे सबकी लाडली थीं और उन्हें परिवार का प्यार और मातृभूमि की मजबूती का बड़ा सहारा मिला।

बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपना घर और गांव छोड़ दिया था। उन्होंने लेह के लैम्डॉन मॉडल स्कूल से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के लिए वे करीब 14 साल तक परिवार से दूर हॉस्टल में रहीं। पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन की वजह से उन्हें स्कॉलरशिप मिली, जिसके सहारे उन्होंने असम की मशहूर तेजपुर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की।

भारतीय सेना में शामिल होने का उनका सफर कॉलेज के दिनों में एनसीसी जॉइन करने के बाद शुरू हुआ। वहीं उन्हें पहली बार पता चला कि आर्मी ऑफिसर बनने के अलग-अलग रास्ते क्या हैं। पूरी तरह सिविलियन बैकग्राउंड से आने की वजह से और परिवार या समुदाय में सेना में जाने की कोई परंपरा न होने के बावजूद ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनने का सपना देखना उनके लिए बिल्कुल अलग बात थी। फिर भी देश की सेवा करने और अपने परिवार तथा इलाके की पहली सेना अधिकारी बनकर वर्दी पहनने की तेज इच्छा उनके मन में जाग उठी।

यह सफर मुश्किलों, चुनौतियों, त्याग और खुद पर शक के पलों से भरा रहा, लेकिन उनके माता-पिता के मजबूत साथ और हिमालय के पहाड़ों से मिली हिम्मत ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ताकत दी।

कुछ दिन पहले ही ऑफिसर कैडेट स्टैंज़िन त्सांगयांग ने कारगिल जिले की पहली महिला अधिकारी के तौर पर पासिंग आउट परेड ग्राउंड पर कदम रखा। देश के सबसे दुर्गम और सुदूर इलाकों से देखे गए सपने भी सबसे ऊंची चोटियों तक पहुंच सकते हैं, इसकी जिंदा मिसाल है स्टैंज़िन का यह सफर।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे