गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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03:00 IST

जीएसबी गणपति मंडल में 5 दिनों में 1 लाख से ज्यादा पूजा-सेवा, 72वां साल

वडाला के जीएसबी सेवा मंडल के महागणपति का इस बार 72वां साल है, 14 से 18 सितंबर तक चलेगा उत्सव।

जीएसबी गणपति मंडल में 5 दिनों में 1 लाख से ज्यादा पूजा-सेवा, 72वां साल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

मुंबई के वडाला में जीएसबी सेवा मंडल का महागणपति, जिसे लोग 'नवस पूरा करने वाला विश्व का राजा' कहते हैं, इस बार अपना 72वां साल मना रहा है। 14 से 18 सितंबर तक चलने वाले इस ऐतिहासिक गणेशोत्सव में कई पवित्र पूजा विधियां होंगी।

जीएसबी सेवा मंडल अपनी अखंड अध्यात्म, धार्मिक निष्ठा और पवित्र पूजा विधियों के लिए खासतौर पर मशहूर है। यही वजह है कि देशभर से भक्त इन पांच दिनों की धार्मिक सेवा के लिए यहां जरूर आते हैं। इस साल बाप्पा का 703 करोड़ रुपये का इंश्योरेंस भी करवाया गया है। सिर्फ 5 दिन ही बाप्पा का दर्शन मिलता है और यहां भक्तों की लंबी लाइन लगी रहती है। कहा जाता है कि यह बाप्पा नवस पूरा करता है, इसीलिए यहां खास इंतजाम भी किए गए हैं। जिन भक्तों का नवस पूरा हो चुका है, वे यहां अपने वजन के बराबर चीजें दान भी करते हैं।

मंडल की तरफ से बताया गया कि इन पांच पवित्र दिनों में पारंपरिक वैदिक पुरोहितों के हाथों 1,00,000 से ज्यादा पूजा और सेवा संपन्न होंगी। इसमें कई तरह की धार्मिक सेवाएं शामिल हैं। खास पूजा में महा मूढगणपति पूजा और मूढगणपति पूजा होगी। हवन और नैवेद्य में सहस्र मोदक हवन व मोदक नैवेद्य रखा गया है। पुष्प सेवा के तहत पुष्प पूजा, पूरे दिन की पुष्प सेवा और रंग पूजा होगी। अर्चन और दीप सेवा में दीपाराधना सेवा तथा दुर्वा अर्चा सेवा शामिल है। अन्न और प्रसाद सेवा में महाभोग सेवा, प्रसाद वितरण सेवा और सहस्र भोजन सेवा दी जाएगी। इसके अलावा खास नवस और सेवा के तौर पर तुलाभार सेवा और पूरे दिन की सेवा भी उपलब्ध रहेगी।

सेवा की पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए, इस उत्सव के दौरान हर दिन 40,000 भक्तों को ताजा महाप्रसाद दिया जाएगा। इस तरह 5 दिनों में 2 लाख से ज्यादा भक्तों के लिए अन्नदान सेवा का इंतजाम किया गया है।

जीएसबी मंडल ने इस बार गणेशोत्सव में डिजिटल तरीका अपनाया है और पारंपरिक छपी हुई पावतियों की पद्धति बंद कर दी है। इससे कागज की बर्बादी रुकती है और पर्यावरण के अनुकूल उत्सव को बढ़ावा मिलता है। मंडल की तरफ से इस गणेशोत्सव में 'गो ग्रीन' यानी पर्यावरणपूरक उपक्रम चलाया जा रहा है। साथ ही महागणपति की मूर्ति भी पर्यावरणपूरक है और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए मंडल की तरफ से पूरी सावधानी बरती जा रही है।

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