जय जय स्वामी समर्थ: सावळ्या के घर बप्पा के आगमन की कहानी, स्वामी की अनोखी लीला
कलर्स मराठी की सीरियल जय जय स्वामी समर्थ में गणेशोत्सव के मौके पर नया मोड़, एक डाकू के घर बप्पा की स्थापना की कहानी
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कलर्स मराठी पर चलने वाली सीरियल जय जय स्वामी समर्थ में अक्कलकोट के गणेशोत्सव के माहौल में कहानी अब एक नया और दिल छू लेने वाला मोड़ लेने जा रही है। शो हर दिन रात 8.10 बजे कलर्स मराठी पर आता है।
कहानी में सावळ्या नाम का एक जवान डाकू है, जो अक्कलकोट इलाके में लगातार डकैतियां डालता रहता है। अपने पिता को छुड़ाने के लिए वह साहूकार गोवर्धन की बेटी इरा का अपहरण कर लेता है। लेकिन इत्तेफाक से इरा के साथ स्वामी समर्थ भी उसके हाथ लग जाते हैं। असल में यह अपहरण स्वामी की अपनी मर्जी से ही हुआ होता है। सावळ्या की कैद में रहते हुए स्वामी उसके गुस्से, नफरत, बदले की भावना और हिंसक स्वभाव पर काम करना शुरू कर देते हैं। इसी बीच इरा के मन में अपने घर के गणपति की याद सताने लगती है।
मां-बाप से दूर रहते हुए भी इरा के मन में गणेशोत्सव मनाने की जो इच्छा है, उसे स्वामी पहचान लेते हैं। उसकी यह ख्वाहिश पूरी करने के लिए स्वामी सावळ्या के ही घर में गणपति बिठाने का फैसला करते हैं। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है, जिस सावळ्या ने कभी जिंदगी में भगवान के सामने हाथ नहीं जोड़े, वह अपने घर में गणपति कैसे बिठाएगा।
स्वामी फिर भी अपनी बात पर अड़े रहते हैं। जब स्वामी सावळ्या को बताते हैं कि इस बार उसके घर में गणपति आएगा और गणपति की मूर्ति वह खुद लेकर आएगा, तो सावळ्या साफ इनकार कर देता है। वह कहता है, "मैं डाकू हूं। मेरे हाथों से भगवान की पूजा नहीं होगी। मैं गणपति नहीं बिठाऊंगा।" स्वामी मगर मजाकिया अंदाज में मानो उसे चुनौती ही दे देते हैं और कहते हैं कि पूरी जिंदगी भगवान के आगे हाथ न जोड़ना कोई गर्व की बात नहीं है।
स्वामी उसे और गहरा इशारा देते हुए कहते हैं, "घर में जब विघ्नहर्ता आएगा, तभी तेरी जिंदगी का विघ्न दूर होगा।" सावळ्या अपना विघ्न खुद दूर करने की जिद में स्वामी की यह चुनौती मानने से इनकार करता है। लेकिन स्वामी भी साफ कह देते हैं, "तेरी जिद से ज्यादा हमारी जिद बड़ी है... इस घर में गणपति बैठेगा ही, और तू खुद उसे बिठाएगा।"
यहीं से शुरू होता है स्वामी की लीला का अनोखा सफर। स्वामी की इस लीला से सावळ्या को एक के बाद एक कई इशारे मिलते जाते हैं। क्या सावळ्या गणपति घर लाने के लिए हामी भरेगा? इससे कई सवाल उठते हैं, एक डाकू के हाथों स्वामी गणपति की स्थापना क्यों करवाना चाहते हैं और गणपति के आने से सावळ्या की जिंदगी में क्या बदलाव आएगा।
क्या स्वामी और सावळ्या के बीच यह सिर्फ जिद की लड़ाई है, या यह एक डाकू के बदलने की शुरुआत है? बप्पा के आने से सावळ्या की जिंदगी का कौन सा विघ्न दूर होगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा। सीरियल के मुताबिक स्वामी की लीला में हर घटना के पीछे एक मकसद और एक ऐसा सच छुपा होता है, जो सही वक्त पर सामने आता है।
गणेशोत्सव के मौके पर सावळ्या के घर बप्पा आने वाले हैं, लेकिन उनके साथ आएगी श्रद्धा की पहली किरण, अच्छी सोच की आहट और एक कठोर दिल के बदलने की शुरुआत। "उत्सव बाप्पा का... लीला स्वामी की... और बदलाव एक जिंदगी का," ऐसा इस नए ट्रैक के बारे में कहा जा रहा है।