जरांगे को हाथ लगाया तो पूरा महाराष्ट्र आ जाएगा, अभिजीत दीपके की सरकार को सीधी चेतावनी
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अंतरवाली सराटी जाकर मनोज जरांगे-पाटील से मुलाकात की और सरकार पर जमकर निशाना साधा।
मराठा आरक्षण समेत कई मांगों को लेकर मनोज जरांगे-पाटील का अंतरवाली सराटी में 29 अगस्त से शुरू हुआ उपोषण आज, 21 सितंबर 2026 को अपने 14वें दिन में पहुंच गया है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अंतरवाली सराटी पहुंचे और जरांगे-पाटील से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार के रवैये पर जोरदार हमला बोलते हुए जरांगे से तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग रखी।
दीपके ने आरोप लगाया कि जरांगे के उपोषण को 14 दिन हो चुके हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई हालचाल पूछने तक नहीं आया। उन्होंने कहा कि जनता के चुने हुए नेता हर किसी से मिलते हैं, फिर जरांगे से बात करने में सरकार को क्या दिक्कत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार समाज के लिए लड़ने वाले जरांगे जैसे व्यक्ति को इसी हाल में छोड़ देगी।
दीपके ने मराठा आरक्षण के मुद्दे के साथ-साथ गांवों में शिक्षा और रोजगार का सवाल भी उठाया। उन्होंने कहा कि अगर गांव-देहात में अच्छी शिक्षा और रोजगार के पर्याप्त मौके होते, तो जरांगे को उपोषण करने की नौबत ही क्यों आती। उनका कहना था कि सरकार ने ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और रोजगार के मसलों को कभी गंभीरता से नहीं लिया, और सरकार को यह समझना जरूरी है कि जरांगे आखिर आरक्षण की मांग क्यों कर रहे हैं।
दीपके ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचूक के आंदोलन का हवाला देते हुए सरकार को सीधी चेतावनी दी। दिल्ली में आंदोलन के दौरान पुलिस ने वांगचूक को हिरासत में लिया था, इसका जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि जरांगे के मामले में ऐसी कोई कार्रवाई करने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा, "यह महाराष्ट्र है, यहां ऐसा बिलकुल नहीं चलेगा। मनोज जरांगे को हाथ लगाया तो पूरा महाराष्ट्र यहां आ जाएगा।"
दीपके ने मांग की कि सरकार खुद अंतरवाली सराटी आकर जरांगे की मांगें सुने। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को अपना काम करने के लिए चुना है, हेलिकॉप्टर में घूमने के लिए नहीं। उनका कहना था कि जरांगे समाज के लिए लड़ रहे हैं और आंदोलन करना उनका पूरा हक है, इसलिए सरकार को इस आंदोलन को नजरअंदाज न करते हुए बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए।
जरांगे के उपोषण की अवधि बढ़ने के साथ ही मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। कई संगठन और नेता जरांगे के आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं, ऐसे में आगे सरकार क्या रुख अपनाती है और जरांगे से बातचीत की पहल करती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।