इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी डे: बिना चीरे दिल की सर्जरी वाली तकनीक की कहानी
16 सितंबर को दुनियाभर में इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी डे मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत डॉ. एंड्रियास ग्रुंट्जिग की पहली एंजियोप्लास्टी से जुड़ी है।
दिल की बीमारियों के इलाज में एक जमाने में ओपन-हार्ट सर्जरी ही इकलौता रास्ता मानी जाती थी, बड़ी और पेचीदा दोनों। लेकिन इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी नाम की मेडिकल साइंस की शाखा ने इस पूरी तस्वीर को बदल दिया। अब बिना कोई बड़ा चीरा लगाए, बहुत कम इनवेसिव तरीके से दिल का सफल इलाज हो पा रहा है। इसी वजह से हर साल 16 सितंबर को पूरी दुनिया में इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी डे मनाया जाता है, ताकि इस मेडिकल शाखा की अहमियत लोगों तक पहुंचे।
इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी असल में कार्डियोलॉजी यानी हृदयरोग विज्ञान की एक स्पेशल ब्रांच है। इसमें कैथेटर नाम की बहुत पतली, ट्यूब जैसी डिवाइस के जरिए दिल की रक्तवाहिनियों में आई रुकावटों को दूर किया जाता है। इसमें मरीज के शरीर पर बड़ा चीरा या टांके लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हाथ या पैर की नस से कैथेटर को सीधे दिल तक पहुंचाया जाता है। इसी तकनीक में कोरोनरी एंजियोप्लास्टी, नसों को खुला रखने के लिए स्टेंट डालना, दिल के वाल्व की मरम्मत यानी वाल्व रिपेयरिंग या टीएवीआर, और जन्म से दिल में मौजूद छेद का इलाज जैसी चीजें शामिल हैं। इससे मरीज को दर्द कम होता है, ब्लीडिंग नहीं होती और वह कुछ ही दिनों में अपने रोजमर्रा के काम पर लौट सकता है।
16 सितंबर की तारीख के पीछे एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी मेडिकल खोज की कहानी है। 16 सितंबर 1977 को स्विट्जरलैंड के जुरिख शहर में डॉ. एंड्रियास ग्रुंट्जिग ने इंसान के शरीर पर दुनिया की पहली सफल पर्क्यूटेनियस ट्रांसल्युमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी यानी पीटीसीए की थी। उन्होंने बैलून कैथेटर की मदद से दिल तक जाने वाली एक ब्लॉक नस को खोल कर दिखाया था। मेडिकल साइंस की इस अभूतपूर्व घटना ने हृदयरोग के इलाज की दिशा ही बदल दी। डॉ. ग्रुंट्जिग के इस योगदान को सम्मान देने और दुनियाभर में हृदयरोग को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सितंबर 2022 में 16 सितंबर को आधिकारिक रूप से इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी डे घोषित किया।
आज की भागदौड़ भरी और बदलती लाइफस्टाइल के चलते हृदयरोग दुनियाभर में मौत की सबसे बड़ी वजह बन गया है। खराब खानपान, एक्सरसाइज की कमी, लगातार मानसिक तनाव, स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज के चलते कम उम्र में भी हार्ट अटैक आने के मामले चिंताजनक रफ्तार से बढ़े हैं। ऐसे में इंटरव्हेंशनल कार्डियोलॉजी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। अगर किसी मरीज को अचानक हार्ट अटैक आ जाए, तो पहले 1 से 2 घंटे के गोल्डन ऑवर में की जाने वाली प्राइमरी एंजियोप्लास्टी उसकी जान बचाने में बेहद असरदार साबित होती है।
आज भले ही अत्याधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी उपलब्ध हो, फिर भी यह याद रखना जरूरी है कि इलाज से बेहतर बचाव है। इसी खास दिन के मौके पर दुनियाभर के हॉस्पिटलों, मेडिकल संस्थाओं और सामाजिक संगठनों की तरफ से वर्कशॉप, फ्री हेल्थ चेकअप कैंप और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं। दिल को सुरक्षित रखने के लिए रोज के खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल और फाइबर वाली चीजें शामिल करना, रोज कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या एक्सरसाइज करना, तनाव कम करने के लिए योगा करना और नियमित हार्ट चेकअप कराना बहुत जरूरी है। मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्दी लाइफस्टाइल को साथ लेकर चलने से हृदयरोग जैसी बीमारियों पर काबू पाया जा सकता है।