गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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04:04 IST

इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में देसी कंपनियों का दबदबा, होंडा-सुझुकी-यामाहा अभी भी पीछे

टीव्हीएस, बजाज, हिरो, एथर और ओला ने इलेक्ट्रिक टू व्हीलर मार्केट में मजबूत पकड़ बना ली है, जबकि जापानी कंपनियों का कंबाइंड शेयर 1 फीसदी से भी कम है।

इलेक्ट्रिक स्कूटर मार्केट में देसी कंपनियों का दबदबा, होंडा-सुझुकी-यामाहा अभी भी पीछे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारत में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर मार्केट पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ रहा है, और इस ग्रोथ स्टोरी में देसी कंपनियां जापानी ब्रांड्स से कहीं आगे निकल गई हैं। अगस्त 2026 में इलेक्ट्रिक दुचाकियों की रजिस्ट्रेशन करीब 1.83 लाख यूनिट तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले 67 फीसदी ज्यादा है। कुल दुचाकी बाजार में इलेक्ट्रिक मॉडल्स की हिस्सेदारी अब लगभग 11 फीसदी हो गई है।

इस बढ़ते मार्केट में टीव्हीएस मोटर, बजाज ऑटो और हिरो मोटोकॉर्प ने इलेक्ट्रिक सेगमेंट में अच्छी पकड़ बना ली है। इनके अलावा एथर एनर्जी और ओला इलेक्ट्रिक जैसी कंपनियां, जो सिर्फ इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस करती हैं, उन्होंने भी ग्राहकों के बीच मजबूत जगह बना ली है। इन कंपनियों को मार्केट में जल्दी एंट्री करने का फायदा मिला, जिससे इन्हें प्रोडक्शन, डीलर नेटवर्क, चार्जिंग सुविधा और सर्विस नेटवर्क बढ़ाने के लिए ज्यादा वक्त मिल गया।

अगस्त के आंकड़ों में टीव्हीएस ने होंडा और बाकी कंपटीटर्स को पीछे छोड़ने में अपने इलेक्ट्रिक मॉडल्स का पूरा फायदा उठाया। टीव्हीएस आयक्यूब और ऑर्बिटर को ग्राहकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दूसरी तरफ होंडा ने एक्टिवा:e और क्यूसी1 के जरिए इलेक्ट्रिक सेगमेंट में एंट्री तो कर ली है, लेकिन उसकी सेल आगे चल रहे ब्रांड्स के मुकाबले अभी भी काफी लिमिटेड है।

जापानी कंपनियों की रणनीति यहां अलग नजर आ रही है। होंडा ने जुलाई 2026 में क्यूसी3 लॉन्च करके अपना इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सुझुकी का ई-एक्सेस भी मार्केट में मौजूद है, लेकिन इसे भी देसी कंपनियों जितनी बड़ी सेल अभी तक नहीं मिली है। यामाहा ने 2024 में बेंगलुरु की रिव्हर मोबिलिटी में इन्वेस्टमेंट किया था और फरवरी 2026 में ईसी-06 उतारा, जो रिव्हर इंडी के प्लेटफॉर्म पर बना है। इसके अलावा यामाहा का एरॉक्स EV भी प्रीमियम सेगमेंट में उपलब्ध है।

जापानी कंपनियों की तुलनात्मक रूप से धीमी शुरुआत के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें प्रोडक्ट डेवलपमेंट का टाइम, बैटरी और पार्ट्स की सप्लाई, लोकलाइजेशन, चार्जिंग नेटवर्क और इन्वेस्टमेंट की प्रायोरिटी शामिल हैं। आगे देखना यह होगा कि क्या देसी कंपनियों की यह बढ़त आगे भी बनी रहती है, या जापानी ब्रांड्स जोरदार वापसी करते हैं।

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