गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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04:23 IST

IAS अफसर को सस्पेंड करने का अधिकार आखिर किसके पास होता है, राज्य के पास या केंद्र के पास?

जिले की कमान संभालने वाले IAS अफसर को नौकरी से हटाने का पावर किसके हाथ में होता है, यह जानना जरूरी है।

IAS अफसर को सस्पेंड करने का अधिकार आखिर किसके पास होता है, राज्य के पास या केंद्र के पास? तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

देश की सबसे ताकतवर और इज्जतदार सिविल सर्विस मानी जाने वाली भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के अफसरों के पास जिले की कमान संभालने से लेकर बड़े-बड़े पॉलिसी डिसीजन लेने तक का अधिकार होता है। आम आदमी की नजर में तो कलेक्टर की कुर्सी किसी राजा से कम नहीं होती। लेकिन इतनी बड़ी पावर और रुतबे के साथ-साथ इन अफसरों पर प्रशासनिक अनुशासन की तलवार भी हमेशा लटकती रहती है।

आपने अक्सर खबरों में सुना होगा कि भ्रष्टाचार के किसी मामले में, लापरवाही की वजह से या किसी विवाद में फंसने पर किसी बड़े IAS अफसर को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन जिस अफसर के आदेश पर पूरा जिला चलता है, उसे कुर्सी से हटाने या सस्पेंड करने की ताकत आखिर किसके पास होती है, यह सवाल कभी दिमाग में आया है? क्या राज्य सरकार अपनी मर्जी से किसी IAS अफसर को घर बिठा सकती है, या इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है? आइए समझते हैं यह पूरा नियम।

दरअसल IAS अफसर भले ही किसी राज्य में तैनात हों और वहां की जनता के लिए काम कर रहे हों, फिर भी वे अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा होते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और इनका कैडर कंट्रोलर केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय यानी DoPT यानी Department of Personnel and Training होता है। यही वजह है कि IAS अफसरों के मामले में राज्य और केंद्र, दोनों की भूमिका बहुत मायने रखती है।

जब भी किसी IAS अफसर की पोस्टिंग किसी राज्य में होती है, तो प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए राज्य सरकार के पास उसे तुरंत सस्पेंड करने का पहला अधिकार होता है। अगर राज्य सरकार को लगे कि कोई अफसर भ्रष्टाचार में शामिल है, अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहा है या गंभीर लापरवाही बरत रहा है, तो मुख्यमंत्री या मुख्य सचिव उस अफसर को सस्पेंड करने का ऑर्डर जारी कर सकते हैं। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती।

ऑल इंडिया सर्विस डिसिप्लिन एंड अपील रूल्स, 1969 के तहत नियम बिल्कुल साफ है कि अगर राज्य सरकार किसी IAS अफसर को सस्पेंड करती है, तो उसे 30 दिन के अंदर इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार यानी DoPT को भेजनी होती है। इसके बाद केंद्र सरकार पूरे मामले की गहराई से समीक्षा करती है। अगर केंद्र को सस्पेंशन का यह फैसला सही लगता है, तो उसे आगे जारी रखा जाता है। वहीं अगर कोई गंभीर मामला सीधे केंद्र स्तर पर सामने आता है, तो केंद्र सरकार खुद भी सीधे उस IAS अफसर को सस्पेंड करने की ताकत रखती है।

अब बात करते हैं सस्पेंशन के दौरान अफसर को क्या मिलता है। बहुत लोग यह सोचते हैं कि सस्पेंड होने के बाद अफसर की नौकरी चली जाती है। लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। सस्पेंशन का मतलब होता है काम से कुछ समय के लिए दूर करना, नौकरी खत्म करना नहीं। इस दौरान अफसर को दफ्तर आने की इजाजत नहीं होती। लेकिन नियम के मुताबिक उसे सबसिस्टेंस अलाउंस यानी निर्वाह भत्ता मिलता रहता है, यानी सैलरी का एक हिस्सा, जिससे उसका खर्च चलता रहे। इसके साथ ही मामले की जांच के लिए एक कमेटी बिठाई जाती है, जो तय करती है कि अफसर को दोबारा नौकरी पर बुलाया जाए या उसके खिलाफ आगे विभागीय कार्रवाई की जाए।

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