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04:04 IST

ग्रीस के अटिका चिड़ियाघर में दुर्लभ सुमात्रन बाघिन ने तीन बच्चों को जन्म दिया, संरक्षण को मिली नई उम्मीद

ग्रीस की राजधानी एथेंस के पास अटिका जूलॉजिकल पार्क में एक सुमात्रन बाघिन ने तीन बच्चों को जन्म दिया है, जिससे इस अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण को बल मिला है।

ग्रीस के अटिका चिड़ियाघर में दुर्लभ सुमात्रन बाघिन ने तीन बच्चों को जन्म दिया, संरक्षण को मिली नई उम्मीद
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर दुनिया के लिए एक बहुत खुशी की खबर आई है। ग्रीस की राजधानी एथेंस के करीब मौजूद मशहूर अटिका जूलॉजिकल पार्क में एक सुमात्रन बाघिन ने तीन प्यारे बच्चों को जन्म दिया है। ये बाघ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत संकटग्रस्त यानी क्रिटिकली एंडेंजर्ड प्रजाति में गिने जाते हैं, इसलिए इनके जन्म से वाइल्डलाइफ लवर्स में जबरदस्त उत्साह है।

दुनियाभर में सुमात्रन बाघों की तादाद बहुत तेजी से घट रही है, और इस प्रजाति को पूरी तरह खत्म होने से बचाने के लिए अलग-अलग देशों के चिड़ियाघर मिलकर एक साझा ब्रीडिंग प्रोग्राम चला रहे हैं। ग्रीस में हुए इस जन्म को इसी अंतरराष्ट्रीय मुहिम की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

चिड़ियाघर के अधिकारियों के मुताबिक तीनों बच्चे जुलाई की शुरुआत में पैदा हुए थे, जिनमें दो नर और एक मादा है। नौ हफ्ते पूरे होने पर चिड़ियाघर की एक्सपर्ट वेटरनरी टीम ने इनकी पहली विस्तृत मेडिकल जांच सफलतापूर्वक की। इस जांच में बच्चों का वजन लिया गया और उन्हें बीमारियों से बचाने वाली स्टैंडर्ड 3-इन-1 वैक्सीन लगाई गई। साथ ही इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ रजिस्ट्रेशन और पहचान के लिए तीनों बच्चों के शरीर में माइक्रोचिप्स भी लगाई गई हैं। टीम ने बताया कि सिर्फ दो महीने की उम्र में ही इन बच्चों के दांत और नाखून काफी तेज हो चुके हैं।

ये तीन बच्चे टोबा नाम की बाघिन और आर्गोस नाम के नर बाघ से पैदा हुए हैं। लेकिन इस खुशी की खबर के साथ एक दुख की बात भी जुड़ी है, बच्चों के पिता आर्गोस की कुछ समय पहले कैंसर से मौत हो गई थी। इस वजह से इन नए बच्चों की देखभाल पहले से भी ज्यादा अहम हो गई है। ग्रीस की ऐतिहासिक संस्कृति को सम्मान देते हुए चिड़ियाघर प्रशासन ने एक खास फैसला लिया है, तीनों बच्चों के नाम प्राचीन ग्रीक महाकवि होमर की मशहूर रचना ओडिसी के किरदारों के नाम पर रखे जाएंगे।

सुमात्रन बाघ, जिनका वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस सुमात्रे है, मुख्य रूप से इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर पाए जाते हैं और अभी दुनियाभर में विलुप्त होने की कगार पर खड़े हैं। पाम ऑयल की खेती के लिए बेतहाशा जंगल कटाई, इंसानी दखल से खत्म होते नैचुरल हैबिटेट और इंटरनेशनल मार्केट में अवैध शिकार, ये इनकी घटती संख्या की मुख्य वजहें हैं। एनवायरनमेंट एक्सपर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान के मुताबिक फिलहाल सुमात्रा के जंगलों में 400 से भी कम सुमात्रन बाघ बचे हैं। यही वजह है कि सुरक्षित माहौल में ब्रीडिंग के जरिए इनकी एक बैकअप आबादी तैयार करना बेहद जरूरी हो गया है।

ये सुमात्रन बाघ अभी जिंदा बाघों की सभी प्रजातियों में साइज में सबसे छोटे माने जाते हैं। एक बालिग नर सुमात्रन बाघ की लंबाई करीब 8.4 फीट यानी 2.55 मीटर तक होती है और उनका वजन 140 किलोग्राम तक जा सकता है। ये बहुत फुर्तीले होते हैं, अच्छे तैराक होते हैं और पेड़ों पर चढ़ने में माहिर होते हैं। इनके शरीर पर मौजूद गहरी और पतली धारियां हर बाघ के लिए इंसान के फिंगरप्रिंट जैसी यूनीक होती हैं।

भारत में मिलने वाले मशहूर बंगाल टाइगर से तुलना करें तो सुमात्रन बाघ काफी छोटे होते हैं। भारत में बालिग नर बंगाल टाइगर की लंबाई 2.83 मीटर से 3.11 मीटर तक होती है, जबकि उनका वजन 200 से 260 किलोग्राम या उससे भी ज्यादा हो सकता है। भारतीय मादा बाघिन का वजन भी 110 से 180 किलोग्राम के बीच होता है। इस मुकाबले में सुमात्रन बाघ भले ही छोटे हों, लेकिन उनकी शिकार करने की काबिलियत और फुर्ती कमाल की होती है। ग्रीस में हुए इस जन्म से पूरी दुनिया में इस प्रजाति के फिर से पनपने की एक नई उम्मीद जगी है।

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