गौरी आगमन से पहले घर में क्यों रखी जाती हैं हल्दी-कुंकू से लेकर कलश तक ये चीजें
गणेशोत्सव में गौरी के स्वागत से पहले महाराष्ट्र के घरों में कुछ खास शुभ चीजें रखने की परंपरा है, जिनका जुड़ाव सुख-समृद्धि की मान्यता से माना जाता है।
महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान गौरी आगमन को बड़ा और उत्साह वाला दिन माना जाता है। गौरी के स्वागत की तैयारी में घर की सफाई, सजावट और पूजा का इंतजाम शामिल रहता है। कई घरों में गौरी आगमन से पहले कुछ खास शुभ चीजें घर में रखने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि इन चीजों से घर में सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और मंगलमय माहौल बनता है।
सबसे पहले बात हल्दी-कुंकू की। हिंदू परंपरा में हल्दी और कुंकू को शुभ का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में गौरी आगमन से पहले पूजा की जगह पर हल्दी-कुंकू रखकर घर का माहौल मंगलमय बनाया जाता है।
पूजा में चावल और हल्दी से बनी अक्षता का भी खास महत्व होता है। अक्षता को पूर्णता, समृद्धि और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है, इसलिए गौरी पूजा की तैयारी में अक्षता रखने की परंपरा है।
नारियल को भी हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों में शुभ माना जाता है। यह पूर्णता और मंगल कार्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए गौरी आगमन की तैयारी में पूजा के सामान में नारियल शामिल किया जाता है।
गौरी के स्वागत के लिए ताजे फूल और फूलों की सजावट भी की जाती है। गेंदा, मोगरा जैसे फूलों से घर सजाने पर माहौल खुशनुमा और उत्सव वाला बन जाता है, ऐसी मान्यता है।
आम के पत्तों का तोरण भी शुभ माना जाता है। कई जगहों पर घर के मुख्य दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण लगाने की परंपरा देखने को मिलती है। इसे घर में मंगल माहौल का प्रतीक माना जाता है।
गौरी आगमन से पहले देवघर और मुख्य दरवाजे के पास दीया या दीपक जलाने की भी परंपरा है। रोशनी को अंधेरा दूर कर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक रीति-रिवाजों में कलश का भी खास स्थान है, चाहे वह तांबे का हो या पीतल का। पानी, आम के पत्ते और नारियल रखकर कलश की स्थापना की जाती है। कलश को मंगल कार्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इन शुभ चीजों के साथ-साथ गौरी आगमन से पहले घर की सफाई करने और दहलीज पर रंगोली बनाने को भी अहमियत दी जाती है। साफ-सुथरा घर और सुंदर रंगोली से उत्सव वाला माहौल बनता है।
गौरी आगमन के लिए घर सजाते समय सफाई और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पूजा की चीजें अपने परिवार की परंपरा के मुताबिक रखनी चाहिए, क्योंकि अलग-अलग चीजों को शुभ मानने के तरीके इलाके और परिवार के हिसाब से बदल सकते हैं। इसलिए इन बातों को धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा मानकर ही देखना ठीक रहता है।