नेपाल में बाढ़ से 1399 मौतें, वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले पुनर्निर्माण मदद मांगने भारत पहुंचे
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात करेंगे
पड़ोसी देश नेपाल इस वक्त अपने इतिहास की सबसे भीषण प्राकृतिक आपदाओं में से एक से जूझ रहा है। 26 अगस्त को नेपाल के अलग-अलग इलाकों में आई भयंकर बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे देश में तबाही मचा दी थी। बर्बाद हो चुके ढांचे को फिर खड़ा करना और डगमगाई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना अब नेपाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
इसी मुश्किल घड़ी में भारत से तुरंत आर्थिक, तकनीकी और ढांचागत मदद हासिल करने के लिए नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले गुरुवार को तीन दिन के उच्चस्तरीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।
नेपाल के वित्त सचिव घनश्याम उपाध्याय के मुताबिक, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खास न्योते पर स्वर्णिम वागले भारतीय नेतृत्व से बातचीत करने आए हैं। 26 अगस्त की बाढ़ के बाद नेपाल में सड़कें, पुल, जलविद्युत प्रोजेक्ट और बस्तियां भारी नुकसान झेल चुकी हैं। इसी वजह से नेपाली प्रतिनिधिमंडल भारत सरकार से बड़े पुनर्निर्माण पैकेज और सहयोग की औपचारिक मांग रखेगा।
नेपाल के राष्ट्रीय आपत्ति जोखिम निवारण और व्यवस्थापन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार भोटेकोशी और त्रिशुली नदी घाटी में बाढ़ का सबसे खौफनाक रूप देखने को मिला। इन इलाकों में नदियों का जलस्तर अचानक इतना बढ़ा कि हजारों घर, सड़कें और पुल बह गए। इस आपदा में अब तक 1399 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि विदेशी पर्यटकों समेत 5,179 लोग अभी भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित और दुर्गम इलाकों में सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें दिन-रात राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। इस बाढ़ से नेपाल के कई हिस्सों में आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है और कई अहम जलविद्युत प्रोजेक्ट पानी में डूब जाने से बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई है।
नेपाल के राष्ट्रीय नियोजन आयोग और आपत्ति व्यवस्थापन प्राधिकरण की संयुक्त टीम ने हाल ही में एक 'रैपिड डिजास्टर नीड्स असेसमेंट रिपोर्ट' तैयार की है। इसके मुताबिक बाढ़ से सीधे तौर पर भौतिक संपत्ति का 274.48 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि देश का कुल आर्थिक नुकसान 408.28 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया है। बर्बाद हो चुकी सड़कों, बिजली प्रोजेक्ट्स और नागरिकों के पुनर्वास के लिए नेपाल को 723 अरब नेपाली रुपये (करीब 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर) से ज्यादा की तुरंत जरूरत है। इतनी बड़ी रकम अपने बूते जुटा पाना नेपाल जैसी छोटी अर्थव्यवस्था के लिए मुमकिन नहीं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बिरादरी खासकर भारत की तरफ नेपाल उम्मीद से देख रहा है।
भारत दौरे के दौरान स्वर्णिम वागले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इसके अलावा वे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में सिर्फ आपदा राहत ही नहीं, बल्कि भारत-नेपाल आपसी व्यापार, सीमापार ढांचागत प्रोजेक्ट्स और आर्थिक सहयोग पर भी गहरी बातचीत होने की उम्मीद है।
नेपाल के वित्त मंत्रालय ने 2015 के विनाशकारी भूकंप का हवाला भी दिया है, जब भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए 1 अरब अमेरिकी डॉलर की मदद का ऐलान किया था और संकट के वक्त नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा रहा था। नेपाली प्रतिनिधिमंडल को भरोसा है कि उसी तर्ज पर इस बार भी बाढ़ के बाद के पुनर्निर्माण में भारत अहम भूमिका निभाएगा।
अपने तीन दिन के व्यस्त दौरे में स्वर्णिम वागले कई अहम नागरिक और कारोबारी कार्यक्रमों को भी संबोधित करेंगे। भारत के पूर्व विदेश सचिव और नेपाल में भारत के पूर्व राजदूत श्याम सरन की तरफ से आयोजित खास गोलमेज बैठक में वे विशेषज्ञों से बातचीत करेंगे। इसके अलावा 'कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री' (CII) के कार्यक्रम में वे भारतीय उद्योगपतियों और निवेशकों को नेपाल की आर्थिक नीतियों और पुनर्निर्माण में निवेश के मौकों की जानकारी देंगे। साथ ही दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के अर्थशास्त्र विभाग में डेवलपमेंट पॉलिसी पर होने वाले लेक्चर में भी वे अपनी बात रखेंगे।