गणेशोत्सव 2026: देश के 5 मशहूर गणपति पंडाल, जहां एक बार जरूर जाएं
14 सितंबर से शुरू हो रहे गणेशोत्सव के लिए मुंबई, पुणे, दिल्ली, चेन्नई और हैदराबाद के मशहूर पंडालों की झलक।
गणेशोत्सव अब बस कुछ ही दिन दूर है और भक्तों को बाप्पा के आने का इंतजार है। इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। इन दिनों देशभर में कई बड़े-बड़े पंडाल सजते हैं, जहां बप्पा के दर्शन के लिए भक्तों की जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। अगर आप गणेश भक्त हैं तो देश के कुछ सबसे मशहूर पंडालों के बारे में जान लीजिए, जहां एक बार जरूर जाना चाहिए।
सबसे पहले बात मुंबई के लालबागचा राजा की। गणेशोत्सव और लालबागचा राजा का रिश्ता कुछ खास ही है। देश के तमाम गणपति पंडालों में इसका नाम हमेशा सबसे ऊपर आता है। हर साल यहां लाखों भक्त गणेश दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसकी शुरुआत 1934 में लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल ने की थी। इस गणपति को दुनियाभर में "मन्नत पूरी करने वाला गणपति" यानी मन्नतें पूरी करने वाले गणपति के नाम से जाना जाता है। भव्य सजावट, पुराना इतिहास और भक्तों की गहरी आस्था के चलते यह जगह बेहद लोकप्रिय है।
इसके बाद नंबर आता है पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति का। पुणे गए और दगडूशेठ हलवाई गणपति के दर्शन नहीं किए, तो मानो पुणे ट्रिप अधूरी ही रह गई। हर साल गणेशोत्सव के मौके पर यहां भी भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। यह महाराष्ट्र के सबसे मशहूर और अमीर मंदिरों में गिना जाता है। यहां भक्ति, संस्कृति और शानदार सजावट, तीनों का मजा एक साथ लिया जा सकता है।
दिल्ली में भी गणेशोत्सव की धूम कम नहीं रहती। इन दिनों दिल्ली भी भक्तिमय माहौल में डूब जाती है। यहां लक्ष्मी नगर का महाराजा गणेश पंडाल काफी मशहूर है। सालों से यहां गणपति के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ लगती आ रही है।
चेन्नई में गणेशोत्सव के दौरान इंदु मुनानी का गणेश चतुर्थी पंडाल लगाया जाता है। पर्यावरण के अनुकूल और क्रिएटिव थीम की वजह से यह पंडाल काफी पॉपुलर है। पिछले साल यहां 5000 किताबों से गणपति की मूर्ति बनाई गई थी। खास बात यह रही कि त्योहार खत्म होने के बाद इन किताबों को स्थानीय और जरूरतमंद लोगों में बांट दिया गया, जिससे एक सामाजिक संदेश भी दिया गया।
आखिर में बात हैदराबाद के खैरताबाद गणेश उत्सव की। स्वतंत्रता सेनानी एस. शंकरय्या ने 1954 में खैरताबाद में श्री गणेश उत्सव समिति की स्थापना की थी। शुरुआत में यहां सिर्फ 1 फुट की मूर्ति स्थापित की गई थी, लेकिन अब यहां गणपति की विशाल और भव्य मूर्ति देखने को मिलती है। हर साल हजारों भक्त यह ऊंची और शानदार मूर्ति देखने पहुंचते हैं। यह मूर्ति पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से ही तैयार की जाती है।