FATF बैठक से पहले पाकिस्तान का पैंतरा, मसूद अझर पर 70 लाख का इनाम घोषित
26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अझर को पाकिस्तान ने FIA की रेड बुक में डाला, लेकिन असल सच्चाई कुछ और ही बताई जा रही है
आंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक पाबंदियों की धमकी देने वाली फायनान्शियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की आने वाली बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान ने अपना पुराना सियासी नाटक फिर से दोहराया है। पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अझर को फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी FIA की मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की रेड बुक में शामिल कर लिया है, और उसकी गिरफ्तारी पर 70 लाख रुपये का इनाम रखा है।
अक्टूबर में होने वाली FATF की बैठक में ब्लैक या ग्रे लिस्ट में जाने से बचने के लिए पाकिस्तान ने यह जल्दबाजी में कदम उठाया है, ऐसा साफ दिख रहा है। इससे पहले भी पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव में ऐसा ही नाटक कर चुका है। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पाकव्याप्त कश्मीर के 9 आतंकी ठिकानों पर कामयाब हमला किया था। उस कार्रवाई के बाद मसूद अझर ने खुद संन्यास लेते हुए परिवार के 9 लोगों की मौत की सार्वजनिक तौर पर कबूली दी थी। अब पाकिस्तान सरकार यह ढोंग कर रही है कि वह देश में मौजूद ही नहीं है।
पाकिस्तान पहले दावा करता रहा है कि मसूद अझर पाकिस्तान में नहीं, बल्कि अफगानिस्तान में छिपा बैठा है। 2021 में FIA ने उसे पकड़वाने वाले को 50 लाख रुपये का इनाम रखा था। पांच साल बाद अब यह इनाम 20 लाख रुपये और बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर दिया गया है। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों की टेक्निकल जांच और ताजा रिपोर्ट से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पिछले छह महीने की तहकीकात से पता चला है कि मसूद अझर अफगानिस्तान में नहीं, बल्कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में पूरी सुरक्षा के साथ छिपा हुआ है।
FIA की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई आतंकी हमले के गुनहगारों की सीधी या घुमा-फिराकर मदद करने वाले 19 आतंकियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें हमलावरों को पैसा भेजने वाले और समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने के लिए बोट चलाने में मदद करने वाले लोग शामिल हैं। इस लिस्ट में 17 आतंकियों की फोटो और मुंबई हमले में उनकी खास भूमिका का ब्योरा दिया गया है। मगर पाकिस्तान की दोहरी नीति का सबूत यह है कि दो अहम लोगों की फोटो, लश्कर-ए-तोयबा यानी LeT से उनके कनेक्शन और हमले में उनकी भूमिका की जानकारी चालाकी से हटा दी गई है।
तुरबत निवासी मोहम्मद खान, जिसने हमलावरों को मुंबई तक ले जाने के लिए अल-हुसैनी नाम की बोट दी थी, उसका नाम लिस्ट में तो रखा गया है लेकिन उसकी फोटो और लश्कर-ए-तोयबा से उसके रिश्ते हटा दिए गए हैं। इसी तरह बहावलनगर के अब्दुल रहमान की फोटो और जानकारी 2021 की FIA लिस्ट में थी, मगर इस बार की लिस्ट से उसकी फोटो गायब कर दी गई है। हालांकि अल-हुसैनी और अल-फौज नाम की बोटों से 10 आतंकियों को मुंबई उतारने वाले लश्कर-ए-तोयबा के 11 बड़े आतंकियों के नाम अभी भी इस लिस्ट में कायम हैं।
एक तरफ पाकिस्तान सरकार मसूद अझर के सिर पर 70 लाख रुपये का इनाम रखकर दुनिया को गुमराह कर रही है, तो दूसरी तरफ जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकी का वीडियो सामने आया है जिसमें उसने खुलकर कबूल किया है कि उनके संगठन ने पिछले एक साल में डेढ़ अरब पाकिस्तानी रुपये यानी करीब 150 करोड़ रुपये आतंकी गतिविधियों के लिए जमा किए हैं। इससे साफ हो जाता है कि 70 लाख रुपये का यह इनाम सिर्फ FATF की बैठक में कार्रवाई दिखाने के लिए रचा गया एक दिखावा है। असलियत में पाकिस्तान की धरती पर आतंकी संगठन करोड़ों रुपये का फंड जुटाकर बेखौफ काम कर रहे हैं।