गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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02:59 IST

EV सब्सिडी हमेशा नहीं मिलेगी, सरकार ने ऑटो कंपनियों को खुद तैयार रहने को कहा

भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने SIAM की सालाना कॉन्फ्रेंस में ऑटो कंपनियों को सरकारी मदद पर निर्भर न रहने की सलाह दी।

EV सब्सिडी हमेशा नहीं मिलेगी, सरकार ने ऑटो कंपनियों को खुद तैयार रहने को कहा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों यानी EV को बढ़ावा देने के लिए सरकार जो सब्सिडी और सपोर्ट दे रही है, वो आगे चलकर कम हो सकती है। इसी वजह से केंद्र सरकार ने ऑटो इंडस्ट्री को साफ शब्दों में कह दिया है कि EV कंपनियां अभी से सरकारी मदद के भरोसे न बैठें, बल्कि अपने दम पर बिजनेस बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दें।

भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिजवी ने गुरुवार को वाहन बनाने वाली कंपनियों के संगठन SIAM की सालाना कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से मिले प्रोत्साहन की वजह से ही भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में इतनी तेजी से आगे बढ़ पाया है। लेकिन उनके मुताबिक आने वाले 4 से 5 साल में EV इंडस्ट्री के सामने कई नई चुनौतियां आने वाली हैं, इसलिए कंपनियों को अभी से तैयार रहना होगा।

रिजवी ने बताया कि सरकार ने शुरुआती दौर में इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर को बड़ा सहारा दिया, जिससे मार्केट का दायरा बढ़ा और लोगों का EV पर भरोसा भी बढ़ा। लेकिन अब आगे चलकर कंपनियां हमेशा के लिए सरकारी सब्सिडी या स्कीमों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। उन्होंने कहा कि कंपनियों को प्रोडक्शन कॉस्ट घटाने, टेक्नोलॉजी में सुधार करने और ग्राहकों को बेहतर प्रोडक्ट देने पर ध्यान देना चाहिए।

EV मार्केट में सबसे ज्यादा तेजी इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों में देखी जा रही है। देश में बिकने वाले कुल तीन पहिया वाहनों में से करीब 50 फीसदी अब इलेक्ट्रिक हैं। खास बात यह है कि 2026 के लिए तय किए गए 10 फीसदी के टारगेट से यह आंकड़ा पूरे 5 गुना ज्यादा है। रिजवी के मुताबिक अगले 2 से 3 साल में इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहनों की मार्केट हिस्सेदारी 75 फीसदी तक पहुंच सकती है, यानी इस सेगमेंट में EV कंपनियों के लिए बड़ा मौका है। तीन पहिया वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक टू व्हीलर का मार्केट अभी भी बढ़ने के दौर में है। फिलहाल देश की कुल टू व्हीलर बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी करीब 7 फीसदी है, जबकि कारों में यह हिस्सेदारी लगभग 4 से 5 फीसदी है। सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक बस सेक्टर में भी बड़ा स्कोप है, लेकिन अभी इलेक्ट्रिक बसों की डिमांड और सप्लाई में बड़ा गैप है, जिसे पाटने के लिए कंपनियों को प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ानी होगी।

रिजवी ने यह भी कहा कि सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बनाना काफी नहीं है, देशभर में मजबूत चार्जिंग नेटवर्क खड़ा करना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए कंपनियों को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भी ज्यादा एक्टिव रोल निभाना चाहिए। मंत्रालय ने 60 हाई प्रायोरिटी कॉरिडोर के इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सरकार का टारगेट है कि अगले 2 से 3 साल में बड़े हाईवे पर पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं मिल जाएं।

कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी R&D पर ज्यादा खर्च करने की सलाह भी दी गई है, ताकि नई टेक्नोलॉजी मार्केट में जल्दी लाई जा सके। इसके अलावा सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने भी कहा कि आने वाले समय में फ्यूल के अलग-अलग विकल्पों और पावरट्रेन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार और ऑटो इंडस्ट्री को मिलकर काम करना होगा।

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