डिजिटल कर्ज लेने में छोटे शहर आगे, नागपुर जैसे Tier 2 शहरों ने मारी बाजी: रिपोर्ट
Pahle India Foundation और Amazon Pay के DCII 2026 रिपोर्ट में सामने आया कि डिजिटल कर्ज लेने में Tier 2 शहर बड़े शहरों से आगे निकल गए हैं।
डिजिटल पेमेंट में भारत पहले से ही दुनिया से आगे है, अब डिजिटल कर्ज यानी लोन लेने के मामले में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी को लेकर Pahle India Foundation और Amazon Pay ने मिलकर देश का पहला Digital Credit and Inclusion Index, यानी DCII 2026, लॉन्च किया है। यह रिपोर्ट 20 राज्यों के 100 शहरों में 5000 से ज्यादा लोगों से बात करके तैयार की गई है। रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि बड़े शहरों के मुकाबले छोटे शहर यानी Tier 2 शहर डिजिटल लोन लेने में सबसे आगे निकल गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक Tier 2 शहरों का स्कोर 58.64 है, जबकि मुंबई-दिल्ली जैसे Tier 1 बड़े शहरों का स्कोर सिर्फ 53.1 है। Tier 3 शहरों का स्कोर 55.7 है। कोयंबटूर, सूरत, नागपुर, इंदौर, प्रयागराज, रांची और लुधियाना जैसे शहर अब डिजिटल क्रेडिट में लीड कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन छोटे शहरों में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। यहां पुरुष और महिलाओं के स्कोर में फर्क सिर्फ 2.8 पॉइंट का है, जबकि बड़े शहरों में यह फर्क 9.1 पॉइंट का है। यानी छोटे शहरों में सबको बराबर मौका मिल रहा है।
देश का कुल DCII स्कोर 55.85 है, जिसके चलते भारत अब "इमर्जिंग एंड सर्व्ड" कैटेगरी में आ गया है। पहुंच यानी Access का स्कोर सबसे ज्यादा 61.24 है, मतलब लोगों तक यह सुविधा पहुंच चुकी है। लेकिन इसका असली फायदा हो रहा है या नहीं, यह बताने वाला Impact स्कोर थोड़ा कम यानी 49.16 है।
रिपोर्ट की एक खास बात यह भी है कि नौकरी करने वाली महिलाओं का स्कोर पुरुषों से आगे निकल गया। जहां आमतौर पर हर जगह पुरुषों का स्कोर ज्यादा रहता है, वहीं सैलरी पाने वाली महिलाओं का स्कोर 62.0 है और पुरुषों का 60.2। यानी जब महिला के पास खुद की सैलरी होती है, तो वह डिजिटल कर्ज को भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल करती है। उम्र के हिसाब से भी यह फर्क कम होता दिख रहा है। 18 से 29 साल के युवाओं में लड़के-लड़कियों के स्कोर में फर्क सिर्फ 2.9 पॉइंट है, जबकि 60 साल से ऊपर के लोगों में यह 4.6 पॉइंट है। इससे साफ है कि नई पीढ़ी इस मामले में ज्यादा बराबरी दिखा रही है।
94.4% लोगों को डिजिटल क्रेडिट के बारे में जानकारी है, यानी जागरूकता की कोई कमी नहीं है। असली दिक्कत भरोसे की है। डिजिटल पेमेंट पर लोगों का भरोसा 69.7 है, लेकिन डिजिटल कर्ज पर सिर्फ 52.5। लोगों को अब भी लगता है कि ऑनलाइन लोन लेना जोखिम भरा है। जब पैसों की जरूरत पड़ती है, तो 48.2% लोग अपनी बचत इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ 6.9% लोग लोन ऐप का इस्तेमाल करते हैं और 3.4% लोग BNPL यानी Buy Now Pay Later का सहारा लेते हैं। यानी मुश्किल वक्त में अब भी डिजिटल लोन लोगों की पहली पसंद नहीं बना है।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि गृहिणी, गिग वर्कर, रोजाना मजदूरी करने वाले और स्टूडेंट का स्कोर सैलरी पाने वालों के मुकाबले 11 पॉइंट कम है, क्योंकि उनके पास ठीक से इनकम प्रूफ नहीं होता, जिस वजह से उन्हें लोन नहीं मिल पाता। लोन लेने की वजह पर नजर डालें तो 59% लोग मोबाइल, टीवी, फ्रिज जैसी चीजें खरीदने के लिए लोन लेते हैं। बिजनेस या प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने का स्कोर सिर्फ 43.2 है। लेकिन जो लोग बार-बार लोन लेते हैं, उनमें से 64% लोग इसे बिजनेस में लगाते हैं, यानी एक बार आदत पड़ने के बाद लोग इसे समझदारी से इस्तेमाल करने लगते हैं।
Pahle India के अध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि आर्थिक समावेशन को सिर्फ इस आधार पर नहीं मापना चाहिए कि यह कितने लोगों तक पहुंचा, बल्कि इससे असल में कितना फायदा हुआ, यह भी देखना जरूरी है। Amazon Pay इंडिया के CEO विकास बंसल ने कहा कि उनके 75% ग्राहक Tier 2 और Tier 3 शहरों से हैं और यह रिपोर्ट उन्हें इन ग्राहकों के लिए बेहतर प्रोडक्ट बनाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित होगा और इसमें डिजिटल क्रेडिट की बड़ी भूमिका रहने वाली है।