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04:04 IST

ब्रिक्स देशों का नया शिक्षा एजेंडा, AI से लेकर स्पेस टेक तक बदलेंगी नौकरी की जरूरतें

ब्रिक्स देशों के शिक्षा मंत्रियों ने AI, स्किल्स और स्पेस टेक्नोलॉजी को लेकर संयुक्त एजेंडा तय किया है, जिससे आने वाले समय में पढ़ाई और नौकरी दोनों की दिशा बदल सकती है।

ब्रिक्स देशों का नया शिक्षा एजेंडा, AI से लेकर स्पेस टेक तक बदलेंगी नौकरी की जरूरतें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं रह गया है। साल 2025 में ब्रिक्स देशों के शिक्षा मंत्रियों ने शिक्षा में AI के इस्तेमाल, AI साक्षरता और जिम्मेदार तरीके से AI के इस्तेमाल को लेकर एक संयुक्त घोषणा की थी। इसमें कहा गया कि AI पढ़ाई के नतीजे बेहतर बना सकता है, शिक्षा को ज्यादा पर्सनल बना सकता है और शिक्षा में जो गैप है उसे कम कर सकता है। साथ ही डेटा प्राइवेसी, एल्गोरिदम में पूर्वाग्रह और नैतिक इस्तेमाल जैसी चुनौतियों पर भी जोर दिया गया।

ब्रिक्स के उच्च शिक्षा सहयोग में कंप्यूटर साइंस और इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी पहले से ही अहम विषयक क्षेत्र माने जाते हैं। ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी के जरिए इन क्षेत्रों में साझा कार्यक्रम, रिसर्च और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। यानी आने वाले समय में डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी स्किल्स पढ़ाई और नौकरी दोनों के लिए जरूरी हो सकती हैं।

ब्रिक्स देशों ने तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा व ट्रेनिंग को भी अपने शैक्षणिक सहयोग का बड़ा हिस्सा बनाया है। साल 2026 में भारत की अध्यक्षता में हुई BRICS-TCA बैठक में डिजिटल और ग्रीन ट्रांजिशन से जुड़े वर्कफोर्स पर बातचीत हुई। भारत ने BRICS इंटरनेशनल स्किल गैप स्टडी और BRICS स्किल्स कॉम्पिटिशन जैसे प्रस्ताव भी रखे हैं।

भविष्य की स्किल्स की बात सिर्फ AI तक सीमित नहीं है। BRICS के TVET सहयोग में इंटरनेट ऑफ थिंग्स, स्मार्ट सिटीज, स्मार्ट हेल्थकेयर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई पीढ़ी की स्किल्स को शामिल करने पर पहले से बातचीत चल रही है। ऐसे में इंजीनियरिंग और व्यावसायिक शिक्षा में इन क्षेत्रों से जुड़े प्रैक्टिकल कोर्स और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड ट्रेनिंग की भूमिका बढ़ सकती है।

स्पेस भी ब्रिक्स के लिए तेजी से आगे बढ़ने वाला सहयोग क्षेत्र है। जून 2026 में बेंगलुरु में BRICS हेड्स ऑफ स्पेस एजेंसीज की बैठक हुई, जिसमें सदस्य देशों ने रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और स्पेस सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर बात की। इससे स्पेस साइंस, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग, अर्थ ऑब्जर्वेशन और स्पेस डेटा जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और स्किल्स को लेकर सहयोग बढ़ रहा है।

क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबल डेवलपमेंट भी BRICS के शैक्षणिक एजेंडे का हिस्सा हैं। ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में पर्यावरण विज्ञान और जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, जल संसाधन और प्रदूषण नियंत्रण शामिल हैं। यानी आने वाले वक्त में रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, वॉटर मैनेजमेंट और पर्यावरण से जुड़े डेटा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग विषयों को जोड़ने वाली स्किल्स की जरूरत बढ़ सकती है।

ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी का मकसद ही सदस्य देशों के उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच साझा रिसर्च, शैक्षणिक आवाजाही और नए शैक्षणिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना है। 2026 में इसके नेटवर्क को और मजबूत करने पर भी काम हुआ। जुलाई 2026 में भारत में हुई बैठक में पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को नया विषयक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया।

ब्रिक्स का यह एजुकेशन एजेंडा बताता है कि आने वाले समय में सिर्फ पारंपरिक डिग्री काफी नहीं होगी। AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, IoT, ड्रोन्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, ग्रीन टेक्नोलॉजी और डिजिटल स्किल्स जैसे क्षेत्रों की जानकारी और प्रैक्टिकल स्किल्स स्टूडेंट्स के लिए ज्यादा अहम हो सकती हैं। खास बात यह है कि ब्रिक्स देश इन स्किल्स को उच्च शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावसायिक ट्रेनिंग से भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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