बिना हाथों के पैदा हुए युवक ने पैरों से लिखना सीखा, आज बने सरकारी टीचर, अब IAS बनने का सपना
आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के एक गांव की कहानी, जहां चाचा के एक आइडिया ने भतीजे की पूरी जिंदगी बदल दी
हिम्मत और मेहनत हो तो इंसान बड़ी से बड़ी मुश्किल को भी पीछे छोड़ सकता है। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के गणीशेट्टीपालेम नाम के एक छोटे से गांव में रहने वाले जामी सिम्हाचलम नायडू ने यही करके दिखाया है। जामी दोनों हाथों और एक पैर में गंभीर दिव्यांगता के साथ पैदा हुए थे, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी राह में रुकावट नहीं बनने दिया।
बचपन में जामी को देखकर लोग यही सोचते थे कि यह लड़का आगे चलकर क्या करेगा। लेकिन आज उसी जामी ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाए।
जामी के दोनों हाथ जन्म से ही काम नहीं करते थे। जब वो सिर्फ साढ़े तीन साल के थे, तब उनके चाचा जामी नरसिम्हा राव ने एक मैगजीन में विदेश के एक ऐसे शख्स के बारे में पढ़ा था, जो अपने पैरों से लिखता था। बस यहीं से चाचा के दिमाग में एक आइडिया आया, और इसी आइडिया ने जामी की पूरी जिंदगी बदल दी।
चाचा ने जामी को पैरों से लिखने की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। शुरुआत में पैर की उंगलियों के बीच चॉक और पेन पकड़कर लिखने की प्रैक्टिस कराई गई। लगातार अभ्यास से नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता है, यह बात जामी के मामले में बिल्कुल सही साबित हुई। कुछ साल की कड़ी मेहनत के बाद वो पैर की उंगलियों से आसानी से लिखने लगे।
इसके बाद जामी ने अपने स्कूल-कॉलेज के सारे एग्जाम और कॉम्पिटिटिव एग्जाम अपने पैरों से लिखकर ही दिए। लिखने के लिए उन्होंने कभी किसी राइटर की मदद नहीं ली। टीचर भर्ती परीक्षा में अच्छी रैंक लाकर पास होने के बाद उनका सेलेक्शन एक सरकारी ट्राइबल वेलफेयर हाईस्कूल में टीचर के तौर पर हुआ। आज वो पैर की उंगलियों में चॉक पकड़कर ब्लैकबोर्ड पर लिखते हुए बच्चों को पढ़ाते हैं।
सरकारी नौकरी मिलने के बाद भी जामी सिम्हाचलम का सफर यहीं नहीं रुका। अब उनका अगला लक्ष्य UPSC परीक्षा पास करके IAS अफसर बनना है। IAS अफसर बनकर देश और समाज की सेवा करने की उनकी गहरी इच्छा है।