भिक्षु का भेष धरकर नागपुर में छिपा था बांग्लादेशी, फर्जी पासपोर्ट केस में एसटीएफ ने पकड़ा
भोपाल एसटीएफ ने नागपुर के यशोधरानगर इलाके से जॉयसन चौधरी नाम के बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया, जो भिक्षु बनकर बौद्ध विहार में रह रहा था।
फर्जी दस्तावेजों के दम पर भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की जांच कर रही भोपाल एसटीएफ की टीम ने नागपुर में बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने जॉयसन चौधरी नाम के बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है, जो अपनी असली पहचान छिपाकर भिक्षु के वेश में रह रहा था।
चौधरी नागपुर के यशोधरानगर थाना क्षेत्र के प्रवेशनगर इलाके में स्थित बौद्ध विहार में रह रहा था। पिछले 4 महीने से उसने यहीं डेरा जमा रखा था और किसी को शक तक नहीं होने दिया कि वह कौन है। गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की टीम उसे आगे की पूछताछ के लिए ग्वालियर ले गई। जॉयसन चौधरी अकेला नहीं है। इसी मामले में करीब 20 बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ लगभग 2 साल पहले ग्वालियर में अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज हुआ था। जांच के दौरान भोपाल एसटीएफ को पता चला कि चौधरी नागपुर जिले में छिपा हुआ है। बताया जा रहा है कि वह पहले नागपुर में ही पकड़े जा चुके बांग्लादेशी पलाश बरुआ उर्फ चौधरी का साथी है, और यही पूरा नेटवर्क उसी के जरिए चलाया जा रहा था।
इससे पहले नागपुर पुलिस भोपाल के रीजनल पासपोर्ट अधिकारी पर भी शिकंजा कस चुकी है। उस मामले में भी सामने आया था कि 2 दर्जन से ज्यादा बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाकर विदेश भेजा जा रहा था।
चौधरी के नागपुर में होने की खबर मिलते ही भोपाल एसटीएफ ने नागपुर एटीएस से संपर्क साधा। इसके बाद यशोधरानगर पुलिस की मदद से एसटीएफ ने उसे दबोच लिया। थाने में जरूरी कार्रवाई पूरी करके टीम सीधे ग्वालियर रवाना हो गई। शुरुआती पूछताछ में चौधरी ने बताया कि करीब 2 साल पहले उसने गुजरात के वडोदरा में फर्जी पासपोर्ट बनवाया था और उसी के सहारे मध्य प्रदेश पहुंचा था। इस मामले में उसके कुछ साथियों को भोपाल एसटीएफ पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। बताया जाता है कि बांग्लादेशियों के खिलाफ 1 मई 2024 को ग्वालियर में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
वहीं दूसरी तरफ, बंगाल के रास्ते अवैध तरीके से भारत में घुसे बांग्लादेशियों को इससे पहले भी पकड़ा जा चुका है, लेकिन पुलिस अब तक उन्हें डिपोर्ट करने की कार्रवाई नहीं कर पाई है।