भारतीय हॉकी टीम एशियन गेम्स में फिर पहनेगी नीली जर्सी, भगवा रंग विवाद खत्म
भगवा जर्सी को लेकर छिड़े विवाद के बाद हॉकी इंडिया ने साफ कर दिया कि आशियाई खेलों में टीम अपनी पुरानी नीली जर्सी में ही उतरेगी।
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भारतीय हॉकी टीम की भगवा जर्सी को लेकर पिछले कुछ महीनों से जो बवाल मचा हुआ था, वो अब थमता दिख रहा है। आने वाले एशियाई खेलों में भारतीय पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमें अपनी पारंपरिक नीली जर्सी में मैदान पर उतरेंगी। यानी टीम इंडिया एक बार फिर ब्लू में वापसी कर रही है।
भारतीय टीम ने नीदरलैंड्स और बेल्जियम में हुए एफआईएच वर्ल्ड कप के दौरान भगवा रंग की जर्सी पहनी थी, जिसके बाद जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया था। उस वक्त जर्सी बदलने के पीछे यह वजह बताई गई थी कि नीले टर्फ पर नीली जर्सी पहनने से खिलाड़ियों को पहचानना मुश्किल हो सकता है।
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने एशियाई खेलों को लेकर पूरी स्थिति साफ करते हुए बताया कि भारतीय ओलंपिक संघ ने टीम की किट के रंगों को लेकर पसंद मांगी थी, और हॉकी इंडिया ने पहली पसंद के तौर पर नीला रंग चुना था, जबकि भगवा रंग दूसरे नंबर पर था। तिर्की ने यह भी कहा कि वर्ल्ड कप से पहले ही उन्होंने साफ कर दिया था कि जर्सी का भगवा रंग स्थायी नहीं है और आगे चलकर इसे बदला जा सकता है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम एशियाई खेलों में नीली जर्सी में ही खेलेगी।
नीदरलैंड्स और बेल्जियम में हुए वर्ल्ड कप से ठीक पहले भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर भगवा किए जाने पर विवाद खड़ा हुआ था। उस वक्त तिर्की ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि यह फैसला उनकी या कार्यकारी बोर्ड की जानकारी के बिना लिया गया था, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। जर्सी बदलने की वजह यह बताई गई थी कि नीले टर्फ पर नीली जर्सी में खेलना खिलाड़ियों के लिए मुश्किल होगा। उस समय कई पूर्व भारतीय हॉकी दिग्गजों ने भी जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा, परगट सिंह, धनराज पिल्लई और अजीत पाल सिंह ने भगवा जर्सी पर अपनी आपत्ति जताई थी। बाद में यह मामला राजनीतिक विवाद में भी तब्दील हो गया था।
वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम को आठवें स्थान पर संतोष करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर, महिला टीम ने पांचवां स्थान हासिल किया, जो 1974 के बाद उनका सबसे बेहतरीन वर्ल्ड कप प्रदर्शन है। अब भारतीय टीमों की नजरें एशियाई खेलों पर टिकी हैं। यह टूर्नामेंट 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का भी एक अहम मौका देगा। ऐसे में एशियाई खेलों में प्रदर्शन भारतीय पुरुष और महिला, दोनों ही टीमों के लिए बेहद अहम रहने वाला है।