9/11 से पहले ही सीआईए की फाइलों में भारत था बिन लादेन के निशाने पर
सीआईए की डिक्लासिफाइड रिपोर्ट में खुलासा, 9/11 हमले से तीन साल पहले ही भारत था अल-कायदा के एजेंडे में शामिल
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अमेरिका की टॉप इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईए की नई गोपनीय फाइलों से एक बड़ा खुलासा हुआ है। अल-कायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन, जो दुनिया भर में आतंकवाद का सबसे बड़ा चेहरा बना, उसने 9/11 के मशहूर आतंकी हमले से पहले ही भारत को अपनी हिंसक योजनाओं में शामिल कर रखा था। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए उस भयानक हमले की 25वीं बरसी के मौके पर सीआईए ने 71 गोपनीय रिपोर्ट्स को सार्वजनिक किया है। इन कागजातों में उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई बेहद संवेदनशील जानकारी शामिल है, जिससे लादेन के आतंकी नेटवर्क की दुनिया भर में फैली पहुंच पर नई रोशनी पड़ी है।
सार्वजनिक की गई फाइलों में 28 अगस्त 1998 को तैयार हुआ एक बेहद अहम दस्तावेज भी है, जिसका टाइटल था "Bin Laden's Terrorist Network Remains a Threat" यानी बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क अभी भी खतरा बना हुआ है। यह रिपोर्ट उस वक्त के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को मिलने वाली रोजाना की इंटेलिजेंस ब्रीफिंग यानी प्रेसिडेंट्स डेली ब्रीफ का हिस्सा थी। इसमें सीआईए ने साफ चेतावनी दी थी कि बिन लादेन का नेटवर्क सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और पाकिस्तान समेत दुनिया के कई देशों में बड़े हमलों की प्लानिंग कर रहा है।
यह रिपोर्ट तैयार होने से महज तीन हफ्ते पहले, यानी 7 अगस्त 1998 को अफ्रीका के नैरोबी (केन्या) और दार-ए-सलाम (तंजानिया) में अमेरिकी दूतावासों पर अल-कायदा ने भीषण बम धमाके किए थे। इन हमलों में 224 बेगुनाह लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग जख्मी हुए थे। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में बिन लादेन के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, लेकिन इन हमलों में लादेन और उसके करीबी साथी बच निकले।
सीआईए की रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल हमलों के बाद भी अल-कायदा का संपर्क नेटवर्क और ट्रेनिंग कैंप फिर से चालू हो गए थे। लादेन ने भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन, युगांडा और नाइजीरिया को अपनी आतंकी योजनाओं के मुमकिन ठिकानों के तौर पर चिन्हित किया था। रिपोर्ट में भारत पर होने वाले किसी खास हमले की जगह या वक्त की जानकारी नहीं दी गई, लेकिन इससे यह साफ हो जाता है कि 9/11 से पूरे तीन साल पहले ही भारत, लादेन के हिंसक ग्लोबल एजेंडे का हिस्सा बन चुका था।
सीआईए के आकलन में यह भी बताया गया था कि बिन लादेन के समर्थकों और साथियों का नेटवर्क कम से कम 60 देशों में फैला हुआ था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अमेरिकी अधिकारियों ने अल्बानिया की राजधानी तिराना और अजरबैजान के बाकू में हमलों की तैयारी कर रहे बिन लादेन के गुर्गों को पकड़ने में वहां के लोकल प्रशासन की मदद की थी। नॉर्थ अमेरिका, यूरोप और ईस्ट एशिया में अल-कायदा का ढांचा इतना मजबूत था कि सीआईए को डर था कि यह नेटवर्क कहीं भी और कभी भी अमेरिकी और पश्चिमी हितों पर हमला कर सकता है।
इन दस्तावेजों के सामने आने से यह बात फिर साबित हुई है कि 9/11 के हमले से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास कितनी अहम जानकारी मौजूद थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 9/11 से तीन साल पहले ही अमेरिका को लादेन के मंसूबों का अंदाजा था, लेकिन इन चेतावनियों को सही तरीके से गंभीरता से न लेने या तालमेल की कमी की वजह से 11 सितंबर 2001 की वह भयानक घटना टाली नहीं जा सकी।
भारत के नजरिए से यह खुलासा बहुत मायने रखता है, क्योंकि 1990 के दशक के आखिरी सालों में ही भारत को अल-कायदा जैसे इंटरनेशनल आतंकी संगठन से जो खतरा था, वह अमेरिकी दस्तावेजों में दर्ज हो चुका था। सीआईए द्वारा सार्वजनिक किए गए ये दस्तावेज दुनिया की सुरक्षा से जुड़े इतिहास के एक अहम दौर की जानकारी देते हैं।