9/11 को 25 साल पूरे: उन 4 विमान अपहरणों ने कैसे बदल दी दुनिया की सियासत
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले के 25 साल पूरे होने पर उस दिन की पूरी घटना और उसके बाद बदले वैश्विक समीकरणों पर एक नजर।
11 सितंबर 2001 की सुबह अमेरिका में एकदम आम दिनों जैसी शुरू हुई थी। लेकिन कुछ ही घंटों में दुनिया की सियासत, इकॉनॉमी और सिक्योरिटी की पूरी तस्वीर हमेशा के लिए बदल गई। अल-कायदा के 19 कट्टरपंथी आतंकियों ने अमेरिका के अंदरूनी रूट पर चलने वाले चार पैसेंजर विमान बड़ी प्लानिंग के साथ हाईजैक कर लिए थे। इन आतंकियों का मकसद था अमेरिका की इकॉनॉमिक और मिलिट्री ताकत दिखाने वाली बड़ी इमारतों और संस्थाओं को निशाना बनाना।
सुबह 8:46 बजे अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 11 न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टॉवर से जा टकराई। दुनिया अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि सिर्फ 17 मिनट बाद, सुबह 9:03 बजे यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 साउथ टॉवर से टकरा गई। महज 104 मिनट में दुनिया के सबसे ऊंचे और मजबूत माने जाने वाले ट्विन टावर पूरी तरह जमींदोज हो गए। तीसरा विमान, अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 77, सुबह करीब 9:37 बजे वॉशिंगटन में अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट के हेडक्वार्टर पेंटागन से जा टकराया।
चौथा हाईजैक विमान, यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 93, को व्हाइट हाउस या यूएस कैपिटल बिल्डिंग पर टकराने की साजिश थी। लेकिन विमान में बैठे कुछ बहादुर पैसेंजर्स ने आतंकियों से सीधी भिड़ंत करके उनका यह प्लान नाकाम कर दिया। इस झड़प में विमान पर कंट्रोल न रहने से वह पेनसिल्वेनिया के शैंक्सविले इलाके के एक खाली खेत में जा गिरा। इस पूरे आतंकी हमले में 100 से ज्यादा देशों के 2,977 बेकसूर लोगों की जान गई और 6,000 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। इस हमले से अमेरिका को 100 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान भी हुआ।
इस हमले ने अमेरिका की सिक्योरिटी और अजेय होने के भ्रम को पल भर में तोड़ दिया। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने फौरन पूरी दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया। अक्टूबर 2001 में अमेरिकी सेना ने अल-कायदा को खत्म करने और तालिबान की सत्ता गिराने के लिए अफगानिस्तान पर हमला बोल दिया। इसके बाद अमेरिका ने इराक में भी दखल दिया। लंबी जद्दोजहद के बाद 2011 में अमेरिका ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को मार गिराया। इसके बाद 2022 में अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में 9/11 के दूसरे मुख्य सूत्रधार अयमान अल-जवाहिरी को भी ढेर कर दिया, जिस पर 25 मिलियन डॉलर का इनाम था।
इस हमले का सबसे बड़ा और अनचाहा असर हुआ दुनिया की महाशक्तियों के समीकरण पर। अमेरिका की पूरी ताकत, फौज और भारी-भरकम आर्थिक संसाधन लंबे समय तक मिडिल ईस्ट और एशिया के रेगिस्तानी इलाकों में उलझे रहे। अफगानिस्तान और इराक की जंग में अमेरिका ने ट्रिलियन डॉलर खर्च कर दिए, जिससे उसकी फौज और इकॉनॉमी दो दशकों तक थकाऊ संघर्ष में फंसी रही।
अमेरिका की यह उलझन चीन के लिए एक बड़ी और अनचाही सामरिक राहत साबित हुई। 2000 के दशक की शुरुआत में अमेरिका चीन की बढ़ती आर्थिक ताकत को रोकने की रणनीति बना रहा था, लेकिन 9/11 के बाद अमेरिका की प्राथमिकता बदल गई और चीन को अपना विस्तार करने का पूरा मौका मिल गया। अमेरिका जब जंगों में उलझा रहा, तब चीन ने चुपचाप और तेजी से अपने इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इकॉनॉमी में बड़े बदलाव कर दिए। चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए एशिया, अफ्रीका, यूरोप और साउथ अमेरिका में अरबों डॉलर का निवेश करके अपना दायरा बढ़ाया। इंडो-पैसिफिक इलाके में चीन ने अपनी नेवल और मिलिट्री ताकत भी काफी बढ़ा ली।
9/11 से पहले अमेरिका दुनिया की इकलौती सुपरपावर मानी जाती थी। लेकिन 9/11 के बाद के दो दशकों में चीन की जबरदस्त आर्थिक तरक्की की वजह से आज दुनिया बहुध्रुवीय बन चुकी है और चीन अमेरिका को सीधी टक्कर देने वाली दूसरी बड़ी महाशक्ति बनकर उभरा है। इस तरह 11 सितंबर के उन चार हाईजैक विमानों ने सिर्फ न्यूयॉर्क में डरावने मंजर ही नहीं दिखाए, बल्कि 21वीं सदी की वैश्विक सियासत की दिशा ही बदल दी।