17 सितंबर को ही क्यों मनाते हैं इंटरनेशनल कंट्री म्युजिक डे, जानें इसकी दिलचस्प कहानी
हर साल 17 सितंबर को दुनियाभर में इंटरनेशनल कंट्री म्युजिक डे मनाया जाता है, जिसका सीधा नाता कंट्री म्युजिक के दिग्गज हैंक विलियम्स की जयंती से है।
संगीत की कोई सीमा, भाषा या इलाका नहीं होता, वो सीधे दिल तक पहुंचता है। ऐसी ही एक म्युजिक स्टाइल को सलाम करने के लिए हर साल 17 सितंबर को इंटरनेशनल कंट्री म्युजिक डे मनाया जाता है। म्युजिक की दुनिया में कंट्री म्युजिक की एक अलग ही इज्जत और भावनात्मक अहमियत है। जिंदगी के सीधे-सादे पल, प्यार, बिछड़ना, स्ट्रगल, नेचर और उम्मीद की किरण, इन सबको सुरों में पिरोने का कमाल इसी म्युजिक में छिपा है।
कंट्री म्युजिक की शुरुआत बीसवीं सदी के शुरुआती दौर में अमेरिका के साउथ के गांव-देहात और अप्पालाचियन पहाड़ी इलाकों में हुई थी। यूरोपियन माइग्रेंट्स की फोक धुनों और अफ्रीकन-अमेरिकन म्युजिक की ब्लूज स्टाइल के मिलने से यह म्युजिक बना। इसमें ज्यादातर एकॉस्टिक गिटार, बैंजो, फिडल और हार्मोनिका जैसे पुराने साज इस्तेमाल होते हैं।
17 सितंबर की तारीख चुनने के पीछे एक खास वजह है। 17 सितंबर 1923 को कंट्री म्युजिक के महानायक और किंग ऑफ कंट्री म्युजिक कहे जाने वाले हैंक विलियम्स का जन्म हुआ था। सिर्फ 29 साल की जिंदगी जीने वाले हैंक विलियम्स ने अपनी लाजवाब राइटिंग और गाने से कंट्री म्युजिक को दुनियाभर में पहचान दिलाई। उनके इसी योगदान को याद रखने के लिए 1950 के दशक से ही 17 सितंबर को दुनियाभर में मनाना शुरू हुआ।
दूसरी म्युजिक स्टाइल्स से कंट्री म्युजिक की खासियत यह है कि इसमें कहानी कहने का अपना अंदाज होता है। इन गानों के बोल ज्यादा पेचीदा नहीं होते, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से सीधे जुड़े होते हैं। खेत में पसीना बहाने वाले किसान के दर्द से लेकर किसी मासूम प्यार की यादों तक, हर भावना इन गानों में उतार दी जाती है। कंट्री गाने सुनते वक्त लोगों को लगता है जैसे यह उनकी अपनी ही जिंदगी की कहानी है। यही वजह है कि यह म्युजिक सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, आयरलैंड और एशियाई देशों में भी खूब पॉपुलर हुआ। नैशविल, टेनेसी शहर आज भी दुनिया की कंट्री म्युजिक कैपिटल के नाम से जाना जाता है।
आज के डिजिटल जमाने में इंटरनेशनल कंट्री म्युजिक डे कई देशों में जोर-शोर से मनाया जाता है। इस दिन दुनियाभर में म्युजिक कॉन्सर्ट्स, लाइव शोज और डांस वर्कशॉप्स, खासकर लाइन डांस, ऑर्गनाइज किए जाते हैं। कई देशों के रेडियो स्टेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म इस दिन पूरा दिन मशहूर कंट्री सिंगर्स के गाने बजाते हैं। यह दिन सिर्फ म्युजिक का मजा लेने का मौका नहीं देता, बल्कि यह भी बताता है कि अलग-अलग कल्चर के बीच भाईचारा और मेलजोल कैसे बनाया जा सकता है। टेक्नोलॉजी के इस दौर में कंट्री म्युजिक इंसानी भावनाओं को जिंदा रखने का काम कर रहा है।