11 सितंबर : जलकर नष्ट हुए लाइब्रेरी खजानों की याद का दिन, जानिए क्यों मनाते हैं
हर साल 11 सितंबर को दुनियाभर में 'लाइब्रेरी रिमेंबर डे' मनाया जाता है, जो जंग, आपदा और आग में तबाह हुई लाइब्रेरियों की याद दिलाता है।
हर साल 11 सितंबर का दिन दुनियाभर में बड़े सम्मान और गंभीरता के साथ 'लाइब्रेरी रिमेंबर डे' के रूप में मनाया जाता है। इंसानी इतिहास में कई बार जंग, नेचुरल डिजास्टर, हमलों या आग की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं की वजह से दुनिया की कई समृद्ध लाइब्रेरियां तबाह हो चुकी हैं।
नालंदा यूनिवर्सिटी की ऐतिहासिक लाइब्रेरी से लेकर आधुनिक दौर की कई दुर्लभ लाइब्रेरियों तक, जब-जब लाइब्रेरियों पर हमला हुआ, तब सिर्फ किताबें ही नहीं जलीं बल्कि इंसानी अक्ल, इतिहास और कल्चर का खजाना भी राख हो गया। यह दिन इन्हीं दुखद घटनाओं को याद करने और उनसे सबक लेने का मौका देता है।
यह दिन हमें साफ तौर पर याद दिलाता है कि लाइब्रेरियां सिर्फ कागज के पन्नों या किताबों से भरे रैक वाले कमरे नहीं हैं। लाइब्रेरियां इंसानी ज्ञान, विचारों की आजादी, डेमोक्रेटिक वैल्यूज और सभ्यता का जिंदा रूप हैं। जब हम एक लाइब्रेरी को बचाते हैं, तो असल में हम एक पूरी पीढ़ी के विचार और अनुभव को सुरक्षित रखते हैं।
11 सितंबर को लाइब्रेरी रिमेंबर डे के मौके पर कई स्कूलों, कॉलेजों, यूनिवर्सिटी और पब्लिक लाइब्रेरियों में खास प्रोग्राम रखे जाते हैं। इनमें दुर्लभ हस्तलिखित दस्तावेज और ऐतिहासिक किताबों की खास प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं। इसके अलावा 'लाइब्रेरियों का संरक्षण और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल' जैसे विषयों पर चर्चा, सेमिनार और लेक्चर भी ऑर्गनाइज किए जाते हैं।
इन प्रोग्राम के जरिए आम लोगों, स्टूडेंट्स और पाठकों को लाइब्रेरियों की सेफ्टी को लेकर जागरूक किया जाता है। किताबों का संरक्षण करना, ऐतिहासिक रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से सहेजना और पढ़ने की आदत बनाए रखना, यह सिर्फ सरकार या लाइब्रेरियन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर तबके का फर्ज है, यही अहम मैसेज इन प्रोग्राम के जरिए दिया जाता है।
डिजिटल जमाने में जानकारी की भरमार हो गई है, फिर भी अधिकृत और असली जानकारी का सबसे बड़ा जरिया आज भी लाइब्रेरियां ही हैं। डिजिटल डाटा खराब हो सकता है या उसमें छेड़छाड़ हो सकती है, लेकिन किताबों के रूप में सहेजा गया इतिहास पीढ़ी दर पीढ़ी सुरक्षित रहता है। किताबें और रिकॉर्ड बचाना मतलब आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुसंस्कृत और वैचारिक रूप से मजबूत समाज बनाना है।
'लाइब्रेरी रिमेंबर डे' इस सोच का प्रतीक है कि ज्ञान की रोशनी कभी बुझनी नहीं चाहिए। यह दिन कल्चर, एजुकेशन, इतिहास और इंसानी याददाश्त का त्रिवेणी संगम है। आज के मॉडर्न दौर में हम सबको लाइब्रेरियों को और समृद्ध बनाने, वहां की सुविधाएं बढ़ाने और पढ़ने के शौक को जिंदा रखने के लिए कमिटेड होना चाहिए।