गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:05 IST

विश्व ओजोन दिवस: क्यों जरूरी है धरती की सुरक्षा परत बचाना, जानें इतिहास और महत्व

हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस, जानें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की कहानी और सेहत पर असर

विश्व ओजोन दिवस: क्यों जरूरी है धरती की सुरक्षा परत बचाना, जानें इतिहास और महत्व
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

धरती के चारों तरफ कुदरत ने एक बेहद ताकतवर और सुरक्षा देने वाली परत बना रखी है, जिसे हम ओजोन परत यानी ओजोन लेयर कहते हैं। यह परत स्ट्रैटोस्फीयर यानी समतापमंडल में पाई जाती है और सूरज से निकलने वाली खतरनाक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणों को सीधे धरती की सतह तक पहुंचने से रोकती है। अगर यह परत नहीं होती, तो पृथ्वी पर जीवन का वजूद ही खतरे में पड़ जाता।

इसी वजह से हर साल 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस यानी वर्ल्ड ओजोन डे मनाया जाता है। इसका मकसद है ओजोन परत को बचाना, इसके नुकसान को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाना।

बात करें इतिहास की, तो बीसवीं सदी के आखिरी दौर में वैज्ञानिकों ने ओजोन परत में हो रहे छेद और उसके लगातार क्षरण को लेकर चेतावनी दी थी। यह साबित हो गया था कि इंसानों की बनाई कुछ केमिकल चीजें, खासकर क्लोरोफ्लोरोकार्बन्स यानी CFCs, हैलोन्स और दूसरे ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थ इस परत को गंभीर हानि पहुंचा रहे हैं। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए 16 सितंबर 1987 को कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर में एक अंतरराष्ट्रीय बैठक बुलाई गई थी। इसी बैठक में दुनिया भर के कई देशों ने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल्स के उत्पादन और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल नाम के ऐतिहासिक करार पर दस्तखत किए।

इसी करार की याद में और दुनिया भर में पर्यावरण को लेकर जागरूकता बनाए रखने के मकसद से संयुक्त राष्ट्र की आमसभा ने 1994 में एक प्रस्ताव पास किया और 16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस घोषित कर दिया। तभी से हर साल दुनिया के तमाम देशों में यह दिन अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए मनाया जाता है।

ओजोन परत के क्षरण की वजह से सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणें सीधे धरती पर पहुंचती हैं। इनके सीधे संपर्क में आने से इंसानों में त्वचा का कैंसर, मोतियाबिंद और इम्यूनिटी कमजोर होने जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। सिर्फ इंसानी सेहत ही नहीं, बल्कि खेती, पेड़-पौधों और समुद्री जीवसृष्टि पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। समुद्र में पाए जाने वाले प्लैंकटन खत्म हो जाते हैं, जिससे समुद्री खाद्य श्रृंखला बिगड़ जाती है और फसलों की पैदावार भी घट जाती है।

वर्ल्ड ओजोन डे सिर्फ रस्मी कार्यक्रम करने का दिन नहीं है, बल्कि यह असल में कुछ कर गुजरने का संदेश देता है। प्लास्टिक पर पूरी तरह पाबंदी लगाना, बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना और ग्रीन एनर्जी व क्लीन एनर्जी को तवज्जो देना ही इसका मुख्य उपाय है। घर में लगे एसी और फ्रिज में सुधरी हुई इको-फ्रेंडली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना भी उतना ही जरूरी है। जब हर नागरिक और सरकार मिलकर हरित पहल को अमल में लाएंगे, तभी हम अपनी अगली पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित और सेहतमंद धरती छोड़ पाएंगे।

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