गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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10:54 IST

विरार में बनावटी परमिशन पर इमारतें, महारेरा रजिस्ट्रेशन बिना फ्लैटों की बिक्री और रजिस्ट्री

विरार पूर्व के नारंगी इलाके में फर्जी बांधकाम परमिशन के आधार पर खड़ी हुई इमारतों में फ्लैट बेचे गए और उनकी रजिस्ट्री भी हो गई, जबकि इन प्रोजेक्ट्स का महारेरा में कोई रजिस्ट्रेशन ही नहीं था।

विरार में बनावटी परमिशन पर इमारतें, महारेरा रजिस्ट्रेशन बिना फ्लैटों की बिक्री और रजिस्ट्री
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

विरार पूर्व के नारंगी इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बनावटी निर्माण परमिशन के दम पर धड़ल्ले से इमारतें खड़ी हो गईं, जबकि खुद महापालिका ने इसी तरह के फर्जी परमिशन के मामले में पहले पुलिस में केस दर्ज कराए थे। हैरानी की बात यह है कि इन प्रोजेक्ट्स का महारेरा में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होने के बावजूद ग्राहकों को यह भरोसा दिलाया गया कि इमारतें अधिकृत हैं, और इस आधार पर फ्लैटों की बिक्री और रजिस्ट्री दोनों हो गईं।

इस पूरे मामले में त्रिरुपती बालाजी कन्स्ट्रक्शन और वी. वी. कन्स्ट्रक्शन के साथ-साथ महापालिका के अफसरों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। महापालिका कमिश्नर के पास 400 पन्नों के सबूतों के साथ इस मामले की हाई-लेवल जांच की मांग की गई है।

नारंगी इलाके के सर्वे नंबर 225 (हिस्सा नंबर 5 और 8) और सर्वे नंबर 232 (हिस्सा नंबर 5) की जमीन पर शिवशक्ति अपार्टमेंट (विंग ए, बी), शिवशक्ति अपार्टमेंट-2 (विंग ए, बी, सी) और ध्रुवी हाइट्स तथा ध्रुवी हाइट्स 02 नाम की इमारतें बनाई गई हैं। इनकी निर्माण परमिशन बनावटी पाए जाने के बाद तत्कालीन असिस्टेंट कमिश्नर ने 2023 में विरार पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था। इसके बावजूद ये इमारतें बिना रुके पूरी कैसे हो गईं और इनमें फ्लैटों की बिक्री कैसे हुई, यह बड़ा सवाल है।

शिकायत में मांग की गई है कि सीनियर अफसरों के जरिए इस पूरे मामले की स्वतंत्र और हाई-लेवल जांच कराई जाए, मूल डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, और दोषी डेवलपर तथा अफसरों के खिलाफ सख्त क्रिमिनल एक्शन लिया जाए।

सवाल यह भी उठाया गया है कि जब महापालिका के अफसरों ने खुद बनावटी निर्माण परमिशन के खिलाफ केस दर्ज कराए थे, तो फिर ये इमारतें पूरी कैसे हुईं। महारेरा रजिस्ट्रेशन न होने के बावजूद रजिस्ट्री और फ्लैटों की बिक्री कैसे हो गई, यह भी साफ नहीं है। आम नागरिकों ने जिंदगीभर की कमाई लगाकर ये घर खरीदे हैं, और इसके पीछे किसी बड़े रैकेट के काम करने की आशंका जताई जा रही है।

सूचना के अधिकार में नगर रचना विभाग ने अपने लिखित जवाब में साफ किया है कि जिन सर्वे नंबरों की बात हो रही है, उन पर निर्माण परमिशन नंबरों का महापालिका के कंप्यूटर सिस्टम में कोई अधिकृत रिकॉर्ड ही नहीं है। सब-रजिस्ट्रार को ऐसी इमारतों की रजिस्ट्री न करने का पत्र दिया गया था, फिर भी फ्लैटों की रजिस्ट्री और प्रॉपर्टी टैक्स दोनों धड़ल्ले से लगाए गए। महारेरा की अनिवार्य रजिस्ट्रेशन न होने के बावजूद आम नागरिकों की जिंदगीभर की कमाई हड़पकर उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। अनधिकृत निर्माण की रजिस्ट्री न करने के निर्देश होने के बावजूद सब-रजिस्ट्रार दफ्तर में खुलेआम रजिस्ट्री की जा रही है, ऐसा कई बार सामने आ चुका है।

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